इन दिनों क्यों Career Catfishing कर रहा ट्रेंड? झूठी स्किल्स और फेक एक्सपीरियंस से कैसे दिया जाता है चकमा

आजकल नौकरी की दुनिया में Career Catfishing तेजी से ट्रेंड कर रहा है। इसमें कैंडिडेट्स अपनी स्किल्स, एक्सपीरियंस और सर्टिफिकेट्स को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं, जिससे वे आसानी से जॉब ऑफर लेटर हासिल कर लेते हैं।
Career Catfishing

जैसे-जैसे दुनिया बदल रही है, वैसे-वैसे तमाम प्रकार के बदलाव अब हमें अपने आस-पास ही देखने को मिलते हैं। आजकल जल्द Gen Z जनरेशन ने रिलेशनशिप के नए नए नाम रखे हैं, बल्कि नौकरियों को लेकर भी कई तरह के नए-नए नाम रखे हैं। जैसे ही माइक्रो रिटायरमेंट, करियर कैटफ़िशिंग , कॉफी बेजिंग वेकेशन जैसे कई Gen Z के टर्म इन दिनों ट्रेंड कर रहे हैं। इन्हीं सबमें से सबसे ज़्यादा कैटफ़िशिंग टर्म काफ़ी ज़्यादा पॉपुलर हो रही है। आज हम आपको इस आर्टिकल में टर्म कैटफ़िशिंग के बारे में विस्तार से बताएंगे, तो चलिए जानते हैं।

कैटफ़िशिंग को अगर सरल शब्दों में समझाया जाए, तो इसका यह मतलब होता है, इस टर्म के अनुसार कैंडिडेट जॉब का ऑफ़र लेटर लेने के बाद, ज्वाइनिंग के कुछ दिन पहले ही अचानक ग़ायब हो जाते हैं। अक्सर ऐसा तब होता है, जब कैंडिडेट्स को ऑफ़िस का वर्किंग एनवायरमेंट अच्छा नहीं लगता है, या फिर ऑफ़िस का स्टाफ़ अच्छा नहीं लगता है, या फिर अपनी जॉब प्रोफ़ाइल के बारे में सही और पूरी जानकारी न होना। यही कारण है कि अक्सर कई प्राइवेट कंपनियां Gen Z को जॉब पर रखने के लिए कतराती हैं, लेकिन सिर्फ़ इतना ही काफ़ी नहीं है, कहीं न कहीं प्राइवेट कंपनियों को भी इस विषय पर विचार करने की आवश्यकता है, कैटफिशिंग के इस ट्रेंड के चलते कंपनियों को भी अपनी रिक्रूटमेंट पॉलिसी को बदलने की आवश्यकता है। वर्क प्लेस के माहौल को बेहतर बनाने के लिए, थोड़े बदलाव करना चाहिए। लेकिन कैटफिशिंग सिर्फ़ नौकरी तक सीमित नहीं है, रिलेशनशिप में भी इस टर्म के बारे में बताया गया है।

रिलेशनशिप और नौकरी में भी कैटफिशिंग

कैटफिशिंग टर्म आमतौर पर रिलेशनशिप में भी सुनने को मिलता है, दरअसल इसमें ऐसा होता है, की आप ऑनलाइन किसी के साथ जुड़े होते हैं, ऑनलाइन आप किसी के साथ होने का दिखावा करते हैं, जिसे डेटिंग स्कैम भी कहा जाता है। जिसमें आप ऑनलाइन किसी और के साथ रहते हैं, और असल ज़िंदगी में आप किसी और के साथ रहते हैं। नौकरी में यह टर्म इसलिए इस्तेमाल किया गया है, क्योंकि जब कैंडिडेट अपनी स्किल्स, एक्सपीरियंस और अपने झूठे सर्टिफ़िकेट के ज़रिये नौकरी का ऑफ़र तो पा लेते हैं, लेकिन जैसे ही ज्वाइनिंग की बात आती है, डर की वजह से कैंडिडेट पीछे हट जाते हैं, या फिर अगर जॉब भी ज्वाइन कर लेते हैं, तो ज़्यादा दिनों तक टिक नहीं पाते हैं।

स्किल छिपाना आसान क्यों हुआ ?

दरअसल, लॉकडाउन के बाद, ज़्यादातर कंपनियों ने वर्क फ़्रॉम होम कर दिया था, जिस वजह से कैंडिडेट के लिए अपनी स्किल छुपाना बेहद आसान हो गया, लेकिन अब लॉकडाउन वाली स्थिति नहीं है, अधिकतर कंपनियां वर्क फ्रॉम ऑफ़िस रखती है , जिस वजह से कैंडिडेट की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं, क्योकि स्किल्स छुपाना मुश्किल हो गया है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। तथ्यों की पड़ताल, महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना और निष्पक्ष खबरों के जरिए लोगों की आवाज़ बनना मेरी पत्रकारिता की पहचान है। View all posts by Bhawna Choubey →
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