
काम का प्रेशर और फैमिली टेंशन के कारण मानसिक तनाव बढ़ जाता है। जिस कारण दिमाग सही से काम नहीं कर पाता। ऐसे में मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं जैसे डिप्रेशन, स्ट्रेस से गिर जाते हैं। शुरुआती दिनों में इस पर ध्यान न देने पर धीरे-धीरे इन गंभीर समस्याओं के शिकार होते चले जाते हैं। कई बार स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। ऐसे में आज 10 अक्टूबर को दुनियाभर में वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे मनाया जा रहा है। हमारी तेज रफ्तार वाली जिंदगी में मन का शोर अक्सर अनसुना रह जाता है। काम, पढ़ाई, सोशल मीडिया और लगातार भागदौड़ के बीच हम अपनेआप से जुड़ना ही भूल जाते हैं। यही चीज धीरे-धीरे मानसिक थकान और तनाव का रूप ले लेता है। ऐसे में जरूरी है कि हम कुछ छोटे और असरदार कदम उठाएं, जो हमारे मन और दिमाग दोनों को सुकून दें।
इस साल 2025 का थीम “Access to Services: Mental Health in Catastrophes and Emergencies” है, यानी आपदा या कठिन परिस्थितियों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच तय करना होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर 10 अक्टूबर को ही यह दिन क्यों मनाया जाता है?
10 अक्टूबर को ही यह दिन क्यों मनाया जाता है?
दरअसल, साल 1992 में वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ (WFMH) नामक संगठन ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से यह दिन शुरू किया था। शुरुआत में इस दिन का कोई तय थीम नहीं था, बस एक ही मकसद था कि दुनिया को यह बताना कि मानसिक बीमारी कोई शर्म की बात नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्थिति है, जिसे समझने और समय रहते संभालने की जरूरत है। धीरे-धीरे हर साल अलग थीम तय होने लगी, ताकि मानसिक स्वास्थ्य के अलग-अलग पहलुओं पर ध्यान दिया जा सके। तब से लेकर आज तक 10 अक्टूबर को यह दिन मनाया जाता है।
World Mental Health Day serves as a powerful reminder that mental health is a fundamental part of our overall well-being. In a fast-paced world, this day underscores the importance of reflecting and extending compassion to others. Let us also work collectively to create…
— Narendra Modi (@narendramodi) October 10, 2025
आदतें
- अगर आप दिनभर स्क्रीन से चिपके रहते हैं, तो घर से बाहर निकलें, आसमान देखें, पेड़ों के नीचे कुछ देर बैठें या बस खुले में गहरी सांस लें। प्रकृति से मिलने वाली शांति किसी दवा से कम नहीं। यह तनाव को कम करती है, साथ ही मन में नई ऊर्जा भी भरती है। रिसर्च भी बताती है कि हर दिन कुछ मिनट हरियाली के बीच बिताना मूड को बेहतर बनाता है।
- कभी-कभी खुशी बहुत छोटी-छोटी बातों में छिपी होती है। दिन खत्म होने से पहले अगर आप तीन चीजें लिख लें जिनके लिए आप आभारी हैं। जैसे किसी दोस्त की मुस्कान, किसी अजनबी की मदद या बस एक अच्छा खाना… ऐसे में धीरे-धीरे जीवन के प्रति आपका नजरिया बदलने लगेगा। इसे ग्रेटिट्यूड जर्नल कहा जाता है।
- कई बार हम स्ट्रेस को नींद की कमी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन असल में दोनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। पर्याप्त नींद न लेने से दिमाग थकान महसूस करता है, जिससे मन बेचैन रहने लगता है। इसलिए जरूरी है कि रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें। सोने से पहले मोबाइल दूर रखें और अपने दिमाग को शांत होने का वक्त दें।
- दिनभर के कामों में खुद को खो देना आसान है, लेकिन खुद के लिए समय निकालना भी उतना ही जरूरी है। चाहे वह किताब पढ़ना हो, गाना सुनना, ड्राइंग बनाना या दोस्तों से बात करना… जो भी चीज आपके दिल को सुकून दे, वही आपका सेल्फ-केय’ है। इसलिए जरूरी है कि दूसरों का ख्याल रखने के साथ-साथ आप अपना भी ख्याल रखें।
- अगर मन में कोई बात परेशान कर रही है, तो उसे दिल में दबाकर मत रखें। किसी भरोसेमंद व्यक्ति से खुलकर बात करें। अपनी भावनाओं को शेयर करें। इससे मानसिक दबाव कम होता है और हल ढूंढना आसान हो जाता है। जरूरत पड़े तो किसी काउंसलर या थेरेपिस्ट की मदद लेने से नहीं हिचकिचाएं।
चलाए जाते हैं अभियान
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने “Advancing Mental Healthcare in India” नामक कार्यक्रम जारी किया था, जिसमें कहा गया कि भारत में जीवनकाल में मानसिक विकारों की वृद्धि दर लगभग 13.7% है। फिलहाल, सरकारी आंकड़ों पर ध्यान देते हुए भी लगातार विभिन्न प्रकार के अभियान चलाए जाते हैं, ताकि इस परिस्थिति को समय रहते सही किया जा सके।
(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)
सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

