लखनऊ: उत्तर प्रदेश अब सिर्फ आबादी के मामले में ही नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी देश का नेतृत्व कर रहा है। राज्य सरकार ने ₹10.48 लाख करोड़ की 330 बड़ी परियोजनाओं के साथ देश का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो तैयार किया है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश को विकास की नई दौड़ में सबसे आगे खड़ा करती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, यह विशाल पोर्टफोलियो राज्य की आर्थिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है। उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि वे समय पर पूरी हो सकें।
पूरी हो चुकीं 39% परियोजनाएं
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, कुल 330 परियोजनाओं में से 128 पूरी होकर शुरू भी हो चुकी हैं। इन पूरी हो चुकी परियोजनाओं की कुल लागत ₹2.37 लाख करोड़ है। इसका मतलब है कि लगभग 39 प्रतिशत प्रोजेक्ट्स जमीन पर उतर चुके हैं।
इसके अलावा, ₹8.11 लाख करोड़ की 202 परियोजनाएं निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं और उन्हें तय समयसीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
एक्सप्रेसवे से लेकर रोपवे तक का नेटवर्क
उत्तर प्रदेश का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास बहुआयामी है। इसमें एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार, रेलवे लाइनों का दोहरीकरण, नए एयरपोर्ट्स का निर्माण और पुराने एयरपोर्ट्स का विस्तार शामिल है। साथ ही, मेट्रो परियोजनाएं, रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और धार्मिक स्थलों पर रोपवे जैसे आधुनिक प्रोजेक्ट्स पर भी तेजी से काम चल रहा है।
“यदि परियोजनाओं और मंजूरियों में देरी होती है तो निवेशक दूसरे राज्यों की ओर रुख करता है। प्रगति मॉडल के जरिए उत्तर प्रदेश ने इस देरी की संस्कृति को तोड़ा है और प्रक्रियाओं को तेज़ किया है।” — योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री
‘प्रगति’ मॉडल ने बदली कार्यसंस्कृति
मुख्यमंत्री ने इस सफलता का श्रेय ‘प्रगति’ जैसे मॉनिटरिंग मॉडल को दिया। उन्होंने कहा कि नियमित समीक्षा और बाधाओं के त्वरित समाधान से परियोजनाओं को गति मिली है। ‘प्रगति’ के तहत शामिल 65 बड़े प्रोजेक्ट्स में से 26 पूरे हो चुके हैं, जबकि 39 पर काम जारी है।
योगी आदित्यनाथ ने जोर देकर कहा कि समय पर पूरा हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर न केवल विकास को गति देता है, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा करता है, जिससे राज्य के युवाओं का भविष्य सुरक्षित होता है।





