लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अब परियोजनाएं सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि जमीन पर साकार होंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की बदली हुई कार्यशैली का श्रेय ‘प्रगति मॉडल’ को दिया है। उन्होंने कहा कि इसी मॉडल की वजह से वर्षों से रुकी हुई विकास परियोजनाओं को नई रफ्तार मिली है और यूपी की छवि एक ‘बॉटलनेक स्टेट’ से बदलकर ‘ब्रेकथ्रू स्टेट’ की बन गई है।
एक समय था जब यूपी में योजनाओं की घोषणा तो होती थी, लेकिन वे पूरी कब होंगी, यह कोई नहीं जानता था। प्रशासनिक सुस्ती और विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण प्रोजेक्ट सालों तक अटके रहते थे। लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है।
क्या है ‘प्रगति मॉडल’?
लखनऊ में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने समझाया कि ‘प्रगति’ सिर्फ एक समीक्षा बैठक का नाम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा प्रभावी सिस्टम है जो इरादे, तकनीक और जवाबदेही को एक साथ जोड़ता है। इस मॉडल के तहत, केंद्र और राज्य सरकार के सभी संबंधित विभाग एक मंच पर आते हैं। इससे परियोजनाओं से जुड़ी हर बाधा को तेजी से दूर किया जाता है।
अब दिनों में निपट रहे हैं मामले
मुख्यमंत्री के अनुसार, पहले भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी या अन्य विभागों से अनुमति लेने में महीनों और सालों लग जाते थे। लेकिन ‘प्रगति मॉडल’ के जरिए अब ऐसे मुद्दे कुछ ही दिनों में सुलझा लिए जा रहे हैं। शासन की कार्यसंस्कृति अब ‘फाइल-केंद्रित’ न होकर ‘फील्ड-आधारित’ परिणामों पर केंद्रित हो गई है। हर प्रोजेक्ट की नियमित समीक्षा होती है और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाती है।
“इसी वजह से उत्तर प्रदेश अब “बॉटलनेक स्टेट” नहीं, बल्कि “ब्रेकथ्रू स्टेट” के रूप में पहचाना जा रहा है, जहां फैसले अटकते नहीं, आगे बढ़ते हैं।” — योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री
इस नई कार्यसंस्कृति ने न केवल रुकी हुई परियोजनाओं को गति दी है, बल्कि राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए एक नया और सकारात्मक माहौल भी तैयार किया है।




