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मध्य प्रदेश के किसानों के लिए महत्वपूर्ण खबर, मूंग-उड़द उपार्जन के लिए पंजीयन 19 जून से, जुलाई से होगा उपार्जन, ऐसी रहेगी पूरी व्यवस्था

Written by:Pooja Khodani
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कृ‍षि लागत एवं मूल्य आयोग भारत सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8682 रूपये प्रति क्विंटल और उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य 7400 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित है।
मध्य प्रदेश के किसानों के लिए महत्वपूर्ण खबर, मूंग-उड़द उपार्जन के लिए पंजीयन 19 जून से, जुलाई से होगा उपार्जन, ऐसी रहेगी पूरी व्यवस्था

मध्य प्रदेश के किसानों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन के लिये किसानों का पंजीयन 19 जून से प्रारंभ होने वाला है। इस संबंध में संबंधित विभाग एवं एजेंसियों को निर्देश जारी कर दिये गये हैं।इसके बाद 7 जुलाई से 6 अगस्त तक उपार्जन किया जाएगा।

इस बार कृ‍षि लागत एवं मूल्य आयोग भारत सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8682 रूपये प्रति क्विंटल और उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य 7400 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।इससे प्रदेश के 36 मूंग और 13 उड़द उत्पादक जिलों को लाभ मिलेगा।मूंग एवं उड़द के लिये संबंधित किसानों को पंजीयन के लिये किसान की फसल का नाम, आधार नंबर, बैंक खाता नंबर, आईएफसी कोड सहित भूअधिकार ऋण पुस्तिका की स्व-प्रमाणित छायाप्रति संलग्न करना होगी।

मई जून में होती है फसल की कटाई

बता दे कि प्रदेश के 36 जिलों में मई माह के तृतीय सप्ताह से जून माह के प्रथम सप्ताह तक मूंग फसल कटाई और प्रदेश के 13 जिलों में मई माह के तृतीय सप्ताह से जून माह के प्रथम सप्ताह तक उड़द फसल की कटाई की जाती है। प्रदेश में मूंग का संभावित क्षेत्राच्छादन 14.35 लाख हेक्टेयर, संभावित उत्पादन 20.23 लाख मीट्रिक टन है। इसी प्रकार उड़द का संभावित क्षेत्राच्छादन 0.95 लाख हेक्टेयर, संभावित उत्पादन 1.24 लाख मीट्रिक टन है।

जानें पंजीयन, व्यवस्था और भुगतान के बारें में

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जित की जाने वाली मूंग एवं उड़द के लिये संबंधित किसानों को पंजीयन के लिये किसान की फसल का नाम, आधार नंबर, बैंक खाता नंबर, आईएफसी कोड सहित भूअधिकार ऋण पुस्तिका की स्व-प्रमाणित छायाप्रति संलग्न करना होगी।
  • बैंक खाता राष्ट्रीयकृत बैंक एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की शाखा का होना अनिवार्य है। सिकमी/बटाई काश्तकार को पंजीयन के लिये आवेदन के साथ सिकमी के अनुबंध की स्व-प्रमाणित प्रति संलग्न करना होगी।
  • किसानों से ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द की उपार्जित मात्रा के भुगतान के लिये कम्प्यूटराईज प्रिंटेड रसीर उपार्जन करने वाली संस्था द्वारा प्रदाय की जायेगी जिसमें किसान का नाम, बैंक खाता क्रमांक तथा भुगतान योग्य राशि का विवरण होगा।
  • इस रसीद पर उपार्जन केन्द्र प्रभारी के हस्ताक्षर भी किये जायेंगे।ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द के उपार्जन करने की जिम्मेदारी संबंधित उपार्जन करने वाली सहकारी संस्थाओं की होगी।
  • उपार्जन केन्द्र से गोदाम तक मूंग-उड़द परिवहन करने के लिये परिवहनकर्ताओं की नियुक्ति एवं अनुबंध की कार्रवाई की जायेगी। उपार्जन केन्द्र पर प्रतिदिन उपार्जन मात्रा की समीक्षा भी होगी।
  • ई-उपार्जन साफ्टवेयर के माध्यम से ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द के परिवहन के लिये जारी रसीद पर परिवहनकर्ता की प्राप्ति कर उसे मूंग-उड़द सौंपा जायेगा।
  • किसी कारणों से एजेंसियों द्वारा नियुक्त परिवहनकर्ता परिवहन करने में विफल होता है तो वैकल्पिक व्यवस्था जिला स्तरीय समितियों द्वारा की जायेगी।
  • परिवहनकर्ता द्वारा विलम्ब से परिवहन करने पर उसके विरूद्ध नियमानुसार उपार्जन एजेंसियों द्वारा पेनाल्टी लगाई जायेगी।
  • उपार्जन केन्द्रों पर किसानों की सुविधा के लिये व्यवस्था उपार्जन समिति होगी, जो केन्द्र पर किसानों के बैठने के लिये छायादार स्थान, साफ पीने के पानी, शौचालय एवं फर्स्ट बॉक्स सुविधा उपलब्ध करायेगी।
  • उपार्जन किये जाने वाले खाद्यान की गुणवत्ता परीक्षण के लिये आवश्यक उपकरण की व्यवस्था भी होगी।
  • इसके लिये विस्तृत परीक्षण भी दिया जायेगा। उपार्जन केन्द्र पर एक बैनर लगाया जायेगा, जिसमें केन्द्र का नाम, एफएक्यू गुणवत्ता का मापदण्ड और भुगतान का उल्लेख होगा।
  • जिन उपार्जन केन्द्रों पर अत्यधिक खरीदी की संभावना होगी, उन केन्द्रों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था की जायेगी।
  • निर्धारित केन्द्रों पर लैपटॉप, प्रिन्टर, बैटरी आदि को चालू अवस्था में रखा जायेगा।
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