कन्नड़ सिनेमा के सुपरस्टार यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ का इंतजार दर्शक लंबे समय से कर रहे हैं। यश के जन्मदिन पर जैसे ही फिल्म का टीजर रिलीज हुआ, सोशल मीडिया पर फैंस की खुशी देखते ही बन रही थी। कुछ ही घंटों में टीजर वायरल हो गया और लाखों व्यूज हासिल कर लिए।
लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई। रिलीज से पहले ही ‘टॉक्सिक’ का टीजर विवादों में घिर गया। आरोप लगे कि टीजर में दिखाए गए कुछ दृश्य अश्लील हैं और समाज पर गलत असर डाल सकते हैं। मामला इतना बढ़ा कि शिकायत सीधे सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन यानी CBFC तक पहुंच गई।
‘टॉक्सिक’ का टीजर और शुरू हुआ विवाद
यश ने 9 जनवरी को अपने जन्मदिन के मौके पर ‘टॉक्सिक’ का टीजर रिलीज किया था। टीजर में यश का स्टाइलिश और डार्क अवतार दिखाया गया, जिसने फैंस को काफी प्रभावित किया। एक्शन, म्यूजिक और सिनेमैटिक ट्रीटमेंट की तारीफ भी हुई। हालांकि, टीजर में दिखाए गए एक बोल्ड और इंटीमेट सीन ने विवाद की चिंगारी जला दी। इस सीन में अभिनेत्री साशा ग्रे नजर आती हैं। कुछ सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं ने इसे भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि इस तरह के दृश्य खुले तौर पर सोशल मीडिया पर दिखाना गलत है।
CBFC में दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत
इस पूरे मामले में कनकपुरा तालुक, रामनगर जिले के सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश कल्लाहल्ली ने ‘टॉक्सिक’ के टीजर के खिलाफ CBFC में शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत सीधे CBFC के चेयरमैन प्रसून जोशी को संबोधित की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ‘टॉक्सिक’ के टीजर में दिखाए गए दृश्य अश्लील, यौन रूप से उत्तेजक और नैतिक रूप से आपत्तिजनक हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह कंटेंट बिना किसी चेतावनी या उम्र सीमा के सोशल मीडिया पर डाला गया, जिससे बच्चे और किशोर भी इसे आसानी से देख सकते हैं।
नाबालिगों पर गलत असर का आरोप
शिकायत में खासतौर पर इस बात पर जोर दिया गया है कि ‘टॉक्सिक’ का टीजर नाबालिगों पर गलत प्रभाव डाल सकता है। आज के समय में सोशल मीडिया हर उम्र के लोगों की पहुंच में है। ऐसे में अगर टीजर में आपत्तिजनक दृश्य खुलेआम दिखाए जाते हैं, तो यह बच्चों के मानसिक और नैतिक विकास के लिए नुकसानदेह हो सकता है। शिकायतकर्ता का कहना है कि फिल्म के प्रमोशनल कंटेंट पर भी वही नियम लागू होते हैं, जो पूरी फिल्म पर होते हैं। इसलिए टीजर में इस तरह के दृश्य दिखाना कानून और नियमों का उल्लंघन है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी उठे सवाल
शिकायत में यह भी कहा गया है कि भले ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, लेकिन यह अधिकार असीमित नहीं है। सार्वजनिक शालीनता, नैतिकता और सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए इस पर सीमाएं लगाई जा सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया है कि अश्लील और यौन रूप से स्पष्ट कंटेंट को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर सही नहीं ठहराया जा सकता। शिकायतकर्ता का तर्क है कि फिल्म ‘टॉक्सिक’ का टीजर इन्हीं सीमाओं का उल्लंघन करता नजर आ रहा है।
सिनेमेटोग्राफ एक्ट और CBFC गाइडलाइंस का जिक्र
शिकायत में सिनेमेटोग्राफ एक्ट, 1952 और CBFC की सर्टिफिकेशन गाइडलाइंस का भी उल्लेख किया गया है। इसमें साफ कहा गया है कि फिल्मों के साथ-साथ उनके टीजर, ट्रेलर और अन्य प्रमोशनल सामग्री भी नियमों के दायरे में आती है। अगर कोई प्रमोशनल कंटेंट सामाजिक मूल्यों के खिलाफ है या अश्लीलता फैलाता है, तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि ‘टॉक्सिक’ के टीजर की तत्काल समीक्षा की जाए और आपत्तिजनक दृश्य हटाए जाएं।
टीजर के सर्कुलेशन पर रोक की मांग
शिकायत में सिर्फ समीक्षा की ही नहीं, बल्कि टीजर के सार्वजनिक प्रदर्शन और ऑनलाइन सर्कुलेशन पर अस्थायी रोक लगाने की भी मांग की गई है। इसके साथ ही फिल्म के निर्देशक, निर्माता और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की अपील भी की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि अगर CBFC समय रहते इस मामले में कदम नहीं उठाता है, तो इसे प्रशासनिक लापरवाही माना जाएगा।
कर्नाटक राज्य महिला आयोग की एंट्री
मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक राज्य महिला आयोग भी सक्रिय हो गया है। आयोग ने इस मामले में CBFC से रिपोर्ट मांगी है। महिला आयोग ने औपचारिक पत्र लिखकर पूछा है कि टीजर में दिखाए गए कंटेंट की जांच नियमों के अनुसार की गई है या नहीं। यह कदम आम आदमी पार्टी की कर्नाटक स्टेट सेक्रेटरी उषा मोहन द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद उठाया गया है। आयोग ने साफ किया है कि CBFC से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।





