मध्य प्रदेश के किसानों के लिए अपडेट, मूंग-उड़द उपार्जन के लिए पंजीयन जारी, 7 जुलाई से होगी खरीदी, जानें रेट-नियम-प्रक्रिया

न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) पर ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द खरीदी के लिए किसान समग्र पोर्टल या नजदीकी कृषि उपज मंडियों में जाकर पंजीयन करा सकते हैं।
Moong Urad

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मध्य प्रदेश के किसानों के लिए जरूरी खबर है। ग्रीष्मकालीन मूंग उड़द के समर्थन मूल्य पर उपार्जन के लिये पंजीयन 19 जून से शुरू हो गए है। अंतिम तिथि 6 जुलाई है।  7 जुलाई से 6 अगस्त तक उपार्जन किया जाएगा।इस बार मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8682 रूपये प्रति क्विंटल और उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य 7400 रूपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।

किसान समग्र पोर्टल या नजदीकी कृषि उपज मंडियों में पंजीयन करा सकते हैं। केवल पंजीकृत किसान ही एमएसपी (MSP) योजना का लाभ उठा सकेंगे। ध्यान रहे मूंग एवं उड़द के लिये संबंधित किसानों को पंजीयन के लिये किसान की फसल का नाम, आधार नंबर, बैंक खाता नंबर, आईएफसी कोड सहित भूअधिकार ऋण पुस्तिका की स्व-प्रमाणित छायाप्रति संलग्न करना होगी।

इन जिलों में होगी मूंग की खरीदी

नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, रायसेन, हरदा, सीहोर, जबलपुर, देवास, सागर, गुना, खंडवा, खरगोन, कटनी, दमोह, विदिशा, बड़वानी, मुरैना, बैतूल, श्योपुर, भिंड, भोपाल, सिवनी, छिंदवाड़ा, बुरहानपुर, छतरपुर, उमरिया, धार, राजगढ़, मंडला, शिवपुरी, अशोकनगर, इंदौर, बालाघाट, सतना।

इन जिलों में उड़द की खरीदी

जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, दमोह, छिंदवाड़ा, पन्ना, मंडला, उमरिया, सिवनी, बालाघाट

किसान ऑनलाइन/ऑफलाइन पंजीयन कैसे कराएं ?

  • मूंग उड़द खरीदी के लिए किसानों को ई उपार्जन पोर्टल  mpeuparjan.nic.in पर ऑनलाइन पंजीयन कराना होगा। सिर्फ वही किसान पंजीयन करा सकेंगे, जिनके पास मूंग या उड़द की फसल का प्रमाण (भूमि और फसल विवरण) है।
  • पंजीयन प्रक्रिया नि:शुल्क है। किसान का आधार नंबर और बैंक खाता लिंक होना जरूरी है। किसान एक ही मोबाइल नंबर से एक ही पंजीयन करा सकेंगे।
  • किसानों को पंजीयन के समय आधार लिंक बैंक खाता, फसल विवरण और उत्पादन की जानकारी देनी होगी। इसके बाद ऑनलाइन स्लॉट बुक कराकर संबंधित उपार्जन केंद्र में अपनी फसल तुलवा सकते हैं।  पंजीकृत मोबाइल नंबर पर मैसेज भेजा जाएगा। इसमें समय और केंद्र का भी जिक्र होगा।
  • किसान अपने ग्राम पंचायत सचिव, कृषि विस्तार अधिकारी या CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) जाकर ऑफलाइन भी पंजीयन करवा सकते हैं। इसके लिए शासन ने कुछ पंजीयन केंद्र भी निर्धारित कर रखे हैं, जहां निर्धारित शुल्क जमा कर पंजीयन करा सकते हैं।

मई जून में होती है फसल की कटाई

बता दे कि प्रदेश के 36 जिलों में मई माह के तृतीय सप्ताह से जून माह के प्रथम सप्ताह तक मूंग फसल कटाई और प्रदेश के 13 जिलों में मई माह के तृतीय सप्ताह से जून माह के प्रथम सप्ताह तक उड़द फसल की कटाई की जाती है। प्रदेश में मूंग का संभावित क्षेत्राच्छादन 14.35 लाख हेक्टेयर, संभावित उत्पादन 20.23 लाख मीट्रिक टन है। इसी प्रकार उड़द का संभावित क्षेत्राच्छादन 0.95 लाख हेक्टेयर, संभावित उत्पादन 1.24 लाख मीट्रिक टन है।

ऐसी रहेगी पूरी व्यवस्था

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जित की जाने वाली मूंग एवं उड़द के लिये संबंधित किसानों को पंजीयन के लिये किसान की फसल का नाम, आधार नंबर, बैंक खाता नंबर, आईएफसी कोड सहित भूअधिकार ऋण पुस्तिका की स्व-प्रमाणित छायाप्रति संलग्न करना होगी।
  • बैंक खाता राष्ट्रीयकृत बैंक एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की शाखा का होना अनिवार्य है। सिकमी/बटाई काश्तकार को पंजीयन के लिये आवेदन के साथ सिकमी के अनुबंध की स्व-प्रमाणित प्रति संलग्न करना होगी।
  • किसानों से ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द की उपार्जित मात्रा के भुगतान के लिये कम्प्यूटराईज प्रिंटेड रसीर उपार्जन करने वाली संस्था द्वारा प्रदाय की जायेगी जिसमें किसान का नाम, बैंक खाता क्रमांक तथा भुगतान योग्य राशि का विवरण होगा।इस रसीद पर उपार्जन केन्द्र प्रभारी के हस्ताक्षर भी किये जायेंगे।
  • ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द के उपार्जन करने की जिम्मेदारी संबंधित उपार्जन करने वाली सहकारी संस्थाओं की होगी।
  • उपार्जन केन्द्र से गोदाम तक मूंग-उड़द परिवहन करने के लिये परिवहनकर्ताओं की नियुक्ति एवं अनुबंध की कार्रवाई की जायेगी। उपार्जन केन्द्र पर प्रतिदिन उपार्जन मात्रा की समीक्षा भी होगी।
  • ई-उपार्जन साफ्टवेयर के माध्यम से ग्रीष्मकालीन मूंग-उड़द के परिवहन के लिये जारी रसीद पर परिवहनकर्ता की प्राप्ति कर उसे मूंग-उड़द सौंपा जायेगा।
  • किसी कारणों से एजेंसियों द्वारा नियुक्त परिवहनकर्ता परिवहन करने में विफल होता है तो वैकल्पिक व्यवस्था जिला स्तरीय समितियों द्वारा की जायेगी।
  • परिवहनकर्ता द्वारा विलम्ब से परिवहन करने पर उसके विरूद्ध नियमानुसार उपार्जन एजेंसियों द्वारा पेनाल्टी लगाई जायेगी।
  • उपार्जन केन्द्रों पर किसानों की सुविधा के लिये व्यवस्था उपार्जन समिति होगी, जो केन्द्र पर किसानों के बैठने के लिये छायादार स्थान, साफ पीने के पानी, शौचालय एवं फर्स्ट बॉक्स सुविधा उपलब्ध करायेगी।इसके लिये विस्तृत परीक्षण भी दिया जायेगा। उपार्जन केन्द्र पर एक बैनर लगाया जायेगा, जिसमें केन्द्र का नाम, एफएक्यू गुणवत्ता का मापदण्ड और भुगतान का उल्लेख होगा।
  • जिन उपार्जन केन्द्रों पर अत्यधिक खरीदी की संभावना होगी, उन केन्द्रों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था की जायेगी। निर्धारित केन्द्रों पर लैपटॉप, प्रिन्टर, बैटरी आदि को चालू अवस्था में रखा जायेगा।
Pooja Khodani
लेखक के बारे में
Pooja Khodani

12 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में.

खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani →
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