भोपाल: मध्य प्रदेश में 25 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए सेवानिवृत्ति से पहले शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य करने के फैसले पर बवाल खड़ा हो गया है। लोक शिक्षण आयुक्त कार्यालय के इस आदेश के विरोध में आज, 13 मार्च को, प्रदेश के हजारों शिक्षक सड़क पर उतर रहे हैं। राजधानी भोपाल समेत सभी जिला मुख्यालयों पर बड़े प्रदर्शन की तैयारी है, जहाँ शिक्षक कलेक्टरों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।
इस मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। सुसनेर से भाजपा के पूर्व विधायक मुरलीधर पाटीदार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह को पत्र लिखकर इस आदेश को शिक्षकों के लिए अपमानजनक बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो शिक्षक समाज उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा और वे स्वयं भी इस आंदोलन का समर्थन करेंगे।
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पूर्व विधायक ने कहा- यह शिक्षकों का अपमान
मुरलीधर पाटीदार ने अपने पत्र में कहा कि प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में वर्षों से समर्पण भाव से अल्प वेतन पर काम कर रहे लाखों शिक्षक, जो पहले शिक्षाकर्मी और संविदा शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए थे, शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं।
“इतने लंबे अनुभव और कार्यसिद्धि के बाद भी उन्हें शासकीय सेवा में स्वयं को फिर से साबित करना होगा, इस आदेश से भ्रम और व्यापक असंतोष की स्थिति बनी है। इससे शिक्षक समाज चिंतित और असुरक्षित महसूस कर रहा है तथा आंदोलन की ओर अग्रसर हो रहा है।”- मुरलीधर पाटीदार, पूर्व विधायक, भाजपा
उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस निर्देश को तत्काल निरस्त किया जाए और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए कोई बीच का रास्ता निकाला जाए, ताकि पुराने शिक्षकों को इस प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।
भोपाल समेत सभी जिलों में आज प्रदर्शन
मप्र शासकीय शिक्षक संगठन के आह्वान पर आज प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर शाम 4 बजे शिक्षक कलेक्ट्रेट कार्यालय पर एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने बताया कि लोक शिक्षण आयुक्त का 2 मार्च का आदेश शिक्षकों में भारी असंतोष पैदा कर रहा है।
उन्होंने तर्क दिया कि जब इन शिक्षकों की भर्ती हुई थी, तब सेवा शर्तों में TET का कोई प्रावधान नहीं था। भर्ती के बाद सेवा शर्तों में इस तरह का बदलाव सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों के भी खिलाफ है। संगठन की प्रमुख मांग है कि मध्य प्रदेश सरकार अन्य राज्यों की तरह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करे।
इन संगठनों ने दिया समर्थन
इस विरोध प्रदर्शन को प्रदेश के कई अन्य शिक्षक और कर्मचारी संगठनों का भी समर्थन मिला है। इनमें अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा, शिक्षक कांग्रेस, प्रांतीय शिक्षक संघ, राज्य कर्मचारी संघ, और अध्यापक गुरूजी संघ जैसे बड़े संगठन शामिल हैं। शिक्षक नेता उपेंद्र कौशल, राकेश पटेल, सुभाष शर्मा, और जितेंद्र शाक्य समेत कई नेताओं ने शिक्षकों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है।