बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों का नाम रखने के लिए सरकार ने मांगे सुझाव, विजेता को मिलेगा फ्री में कूनो घूमने का मौका

केंद्र सरकार ने बोत्सवाना से कूनो नेशनल पार्क लाए गए 9 चीतों के भारतीय नामकरण के लिए आम जनता से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसके लिए जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा और चयनित नाम सुझाने वाले व्यक्ति को कूनो में चीतों को देखने का अवसर मिल सकता है।
बोत्सवाना से लाए गए 9 चीतों का नाम रखने के लिए सरकार ने मांगे सुझाव, विजेता को मिलेगा फ्री में कूनो घूमने का मौका

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में हाल ही में बोत्सवाना से लाए गए नौ चीतों के भारतीय नाम रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक अनूठी पहल की है। इसके तहत आम लोगों से इन चीतों के लिए नाम सुझाने को कहा गया है, जिसके लिए जल्द ही एक विशेष पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। इस प्रक्रिया में भाग लेने वाले और जिनका नाम चुना जाएगा, उन्हें कूनो में चीतों को देखने का मुफ्त मौका भी मिल सकता है।

इस साल 28 फरवरी को बोत्सवाना से लाए गए इन नौ चीतों में छह मादा और तीन नर शामिल हैं। फिलहाल, इन्हें पार्क के दो बड़े बाड़ों (बोमा) में विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया है। विशेषज्ञों की टीम उनके स्वास्थ्य, गतिविधियों और नए वातावरण में उनके अनुकूलन पर लगातार नजर बनाए हुए है।

कैसे सुझा सकते हैं नाम?

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा शुरू किए जाने वाले पोर्टल पर देश भर से कोई भी व्यक्ति इन चीतों के लिए नाम सुझा सकता है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे नाम सुझाएं जो भारतीय संस्कृति, प्रकृति और वन्यजीवों से जुड़े हों। नाम के साथ-साथ लोगों को यह भी बताना होगा कि जानवरों के साथ अच्छा व्यवहार क्यों जरूरी है और भारत में चीता परियोजना का क्या महत्व है।

चयनित होने पर मिलेगा खास इनाम

यह प्रक्रिया सिर्फ नामकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी एक माध्यम है। यदि किसी व्यक्ति द्वारा सुझाया गया नाम अंतिम रूप से चुना जाता है, तो उसे कूनो नेशनल पार्क में इन शानदार जीवों को देखने का अवसर प्रदान किया जा सकता है।

“चीतों के नामकरण में लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। लोगों के सुझावों पर अंतिम निर्णय चीता संचालन समिति करेगी।” — उत्तम कुमार शर्मा, डायरेक्टर, चीता प्रोजेक्ट

वन विभाग के अनुसार, प्रोटोकॉल के मुताबिक लगभग एक महीने के क्वारंटाइन और अनुकूलन प्रक्रिया के बाद इन चीतों को चरणबद्ध तरीके से खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।

पहले भी अपनाई गई है यही प्रक्रिया

यह पहली बार नहीं है जब चीतों के नामकरण के लिए जनता की भागीदारी ली जा रही है। इससे पहले नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों के लिए भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई थी। हालांकि, प्रोजेक्ट की शुरुआत में 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नामीबिया से लाई गई एक मादा चीता का नाम ‘आशा’ रखा था। वर्तमान में कूनो नेशनल पार्क और गांधीसागर अभयारण्य में कुल 53 चीते हैं, जिनमें कई शावक भी शामिल हैं।

Banshika Sharma
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कंटेंट राइटर

मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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