
ग्वालियर, अतुल सक्सेना। पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया की 21वीं पुण्यतिथि (Madhav Rao Scindia death anniversary) पर आज उन्हें पूरा देश याद कर रहा है। ग्वालियर में सिंधिया रियासत की छत्री में कैलाशवासी माधव राव सिंधिया की प्रतिमा और चित्र पर लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किये। लेकिन खास बात ये है कि कांग्रेस ने आज अपनी एक पुरानी परंपरा तोड़ दी।
यशोधरा राजे हुईं भावुक
थीम रोड यानि कटोराताल रोड स्थित सिंधिया राजवंश की छत्री पर मध्य प्रदेश शासन की खेल मंत्री एवं कैलाशवासी माधव राव सिंधिया की छोटी लाड़ली बहन यशोधरा राजे सिंधिया (Yashodhara Raje Scindia) हमेशा की तरह आज भी उनकी पुण्यतिथि पर नमन करने पहुंची। उन्होंने सिंधिया की प्रतिमा और चित्र पर माल्यार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मैं आज अपने भाई की पुण्यतिथि पर उनके सामने नतमस्तक हूँ, इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकती।
ये भी पढ़ें – प्रधानमंत्री ने देश के तीसरी वंदे भारत एक्सप्रेस को दिखाई हरी झंडी

[dgv_vimeo_video id=”755482273″]
कांग्रेस ने भी अपने नेता को याद किया
कांग्रेस (Gwalior Congress) ने भी आज अपने नेता को याद करते हुए उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। महापौर डॉ शोभा सिकरवार, विधायक डॉ सतीश सिकरवार और जिला अध्यक्ष डॉ देवेंद्र शर्मा के साथ सैकड़ों कांग्रेस नेताओं ने सिंधिया छत्री पहुंचकर स्वर्गीय माधव राव सिंधिया के चित्र पर पुष्प अर्पित किये।
ये भी पढ़ें – टाटा मोटर्स के तीन नए Tata Pickup वाहन बढ़ाएंगे रोजगार के अवसर, जानें इनकी ताकत

कांग्रेस ने तोड़ी बरसों पुरानी परंपरा
लेकिन आज खास बात ये रही कि कांग्रेस ने अपनी बरसों पुरानी एक परंपरा को तोड़ दिया। हर साल कांग्रेस माधव राव सिंधिया की पुण्यतिथि पर प्रभात फेरी निकालती थी और उसके बाद छत्री पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित करती थी लेकिन इस बार कांग्रेस नेता सीधे छत्री पहुंचे प्रभात फेरी नहीं निकाली। जब जिला अध्यक्ष डॉ देवेंद्र शर्मा से एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ ने इस विषय पर बात की तो उन्होंने कहा कि प्रभात फेरी सुबह सुबह निकाली जाती थी लेकिन अब उस समय संख्या बल उतना नहीं हो पाता इसलिए नहीं निकाली।
ये भी पढ़ें – गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताई दिग्विजय सिंह के कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की दौड़ से पीछे हटने की वजह

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

