जबलपुर (Jabalpur) के सिहोरा में जन्मी एक नन्ही बच्ची वामिका। दुनिया में आने के कुछ ही घंटों बाद डॉक्टरों ने कहा कि उसकी हालत बेहद नाजुक है। दिल में छेद, सांस लेने में दिक्कत, और जन्मजात हार्ट डिज़ीज़ जिसे मेडिकल भाषा में TGA (Transposition of the Great Arteries) कहा जाता है। किसी भी परिवार के लिए यह खबर दिल दहला देने वाली होती, लेकिन वामिका ने जन्म के सिर्फ 14 दिनों में मौत को मात देते हुए एक ऐसा चमत्कार कर दिखाया, जिसने पूरे मेडिकल समुदाय को हैरान कर दिया।
जबलपुर प्रशासन, राज्य सरकार, आरबीएसके टीम, और मुंबई के नारायणा अस्पताल सबने मिलकर इस बच्ची के लिए वह किया, जो किसी भी परिवार के लिए जीवनभर याद रह जाएगा। आज वामिका न सिर्फ स्वस्थ है, बल्कि खुद सांस भी ले रही है, और डॉक्टरों का कहना है कि वह बहुत जल्द घर जाने के लिए तैयार है।
6 नवंबर को वामिका को एयरलिफ्ट किया गया
वामिका की हालत देखकर आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) टीम तुरंत हरकत में आ गई। डॉक्टरों ने साफ कहा कि बच्ची को तुरंत मुंबई ले जाना होगा, और वहीं उसकी जान बचाने की संभावना है। 6 नवंबर को मध्यप्रदेश सरकार, आरबीएसके विभाग तथा जिला प्रशासन ने मिलकर वामिका को एयर-लिफ्ट कराया। एयरलिफ्टिंग के दौरान बच्ची की हालत स्थिर थी, लेकिन डॉक्टरों को पता था कि समय बेहद कम है। नारायणा अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने बिना देर किए सर्जरी की तैयारी शुरू कर दी।

मुंबई में दो बड़े ऑपरेशन
7 नवंबर को, बच्ची के पांचवें दिन डॉ. प्रदीप कौशिक जो की सीनियर सर्जन है और डॉ. सुप्रीतिम सेन जो की सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट है उन्होंने बैक-टू-बैक दो मेजर ऑपरेशन किए। डॉक्टरों के अनुसार यह ऑपरेशन बेहद जटिल था क्योंकि बच्ची का वजन बहुत कम था, वह सिर्फ 5 दिन की थी दिल में कई लेयर्स में खराबी थी और शरीर अभी पूरी तरह विकसित भी नहीं था फिर भी टीम ने वह कर दिखाया, जो असंभव माना जाता है।
डॉ. सुप्रीतिम सेन ने बताया ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। बच्ची का हार्ट फंक्शन, ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट सब नॉर्मल हो चुका है। सबसे बड़ी बात, हमने उसे वेंटिलेटर से भी हटा दिया है। वह खुद सांस ले रही है, यह हमारे लिए सबसे बड़ी जीत है।
इलाज का खर्च सरकार और फाउंडेशन ने मिलकर उठाया जिम्मा
गंभीर ऑपरेशन और मुंबई एयरलिफ्ट का खर्च लाखों में था। लेकिन यहां भी इंसानियत जीती। आरबीएसके योजना से लगभग 2 लाख रुपये की सहायता मिली बाकी करीब 3 लाख नारायणा फाउंडेशन ने वहन किया। परिवार पर कोई वित्तीय बोझ न पड़े, यह सुनिश्चित करते हुए अस्पताल ने पूरा सहयोग दिया। बच्ची के पिता सत्येंद्र दहिया ने भावुक होकर कहा हमें लगा था कि हम उसे खो देंगे… पर डॉक्टरों और सरकार की मदद ने हमारी बेटी को नया जीवन दे दिया।
डॉक्टरों ने दिया नया नाम
जहां पिता ने बच्ची का नाम वामिका रखा है, वही डॉक्टर सुप्रीतिम सेन प्यार से उसे बेबी शशि कहकर बुलाते हैं। डॉक्टरों के लिए यह बच्ची सिर्फ एक मरीज नहीं रही वह हिम्मत, उम्मीद और विश्वास का प्रतीक बन चुकी है। अस्पताल स्टाफ के अनुसार वामिका अब मुस्कुराती है, खुद सांस ले रही है, दवाइयों का असर बेहतरीन है और वह तेजी से रिकवर कर रही है, अगले कुछ दिनों में उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।






