गर्मी शुरू होते ही जब पंखे, कूलर और एसी का इस्तेमाल बढ़ता है, उसी समय अगर बिजली का बिल भी अचानक बढ़ जाए, तो परेशानी और ज्यादा महसूस होती है। मध्य प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं के साथ इस समय कुछ ऐसा ही हो रहा है। अप्रैल और मई 2026 में बिजली बिल में हुई बढ़ोतरी ने लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है।
यह बढ़ोतरी किसी एक बार में नहीं, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ते सरचार्ज के जरिए हुई है। आम लोगों को शायद शुरुआत में इसका अंदाजा भी नहीं हुआ, लेकिन जब बिल हाथ में आया, तब समझ आया कि खर्च कितना बढ़ चुका है। अब हर घर में यही चर्चा है कि आखिर बिजली बिल इतना ज्यादा क्यों बढ़ गया।
कैसे 11% तक पहुंचा सरचार्ज
मध्य प्रदेश में बिजली बिल बढ़ोतरी का मुख्य कारण फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट (FPPCA) सरचार्ज है। यह वह अतिरिक्त शुल्क होता है, जो बिजली कंपनियां अपने बढ़े हुए खर्च को पूरा करने के लिए उपभोक्ताओं से वसूलती हैं।
अप्रैल 2026 के लिए यह सरचार्ज 5.36 प्रतिशत तय किया गया है। इससे पहले भी अप्रैल में करीब 4.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी लागू हो चुकी थी। यानी अगर दोनों को जोड़कर देखा जाए, तो कुल मिलाकर करीब 11 प्रतिशत तक बिजली बिल में बढ़ोतरी हो गई है।
मार्च 2026 में यह दर निगेटिव थी, जिसका मतलब था कि उस समय लोगों को थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन अब अचानक यह बढ़ोतरी होने से उपभोक्ताओं को झटका लगा है। बिजली बिल बढ़ोतरी की यह प्रक्रिया तकनीकी जरूर है, लेकिन इसका असर पूरी तरह आम लोगों की जेब पर पड़ता है।
क्यों बढ़ा बिजली बिल
बिजली बिल बढ़ोतरी को लेकर जो सबसे बड़ा कारण सामने आ रहा है, वह है बिजली उत्पादन और खरीद की बढ़ती लागत। बिजली कंपनियों का कहना है कि उन्हें बाहर से बिजली खरीदने में ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है, खासकर जब मांग बढ़ जाती है।
गर्मी के मौसम में बिजली की खपत तेजी से बढ़ती है। ऐसे में कंपनियों को अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ती है, जो महंगी होती है। इस बढ़े हुए खर्च को संतुलित करने के लिए ही सरचार्ज लगाया जाता है।
हालांकि, इस पूरे मामले में एक बड़ी बात यह भी है कि आम लोगों को इस बढ़ोतरी की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। न तो कोई विस्तृत सार्वजनिक सूचना आई और न ही कोई स्पष्ट जवाब सामने आया। यही वजह है कि बिजली बिल बढ़ोतरी को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
घरेलू बजट कैसे बिगड़ेगा
बिजली बिल बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर आम आदमी के घरेलू बजट पर पड़ता है। पहले जहां एक परिवार का मासिक बिजली बिल एक तय सीमा में रहता था, अब वही बिल 10 से 15 प्रतिशत तक ज्यादा आ रहा है।
मध्य प्रदेश में मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोग पहले ही महंगाई से जूझ रहे हैं। ऐसे में बिजली बिल बढ़ना उनके लिए अतिरिक्त बोझ बन गया है। किराना, गैस, स्कूल फीस और अन्य जरूरी खर्चों के बीच अब बिजली बिल भी चिंता का कारण बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लगातार बढ़ोतरी से लोगों की बचत पर भी असर पड़ता है। सेवानिवृत्त इंजीनियर राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि बार-बार बिजली बिल बढ़ने से लोगों की आर्थिक योजना बिगड़ जाती है और भविष्य के खर्चों को संभालना मुश्किल हो जाता है।
क्या है FPPCA सरचार्ज
फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट (FPPCA) सरचार्ज एक ऐसा शुल्क है, जो बिजली कंपनियां अपने अतिरिक्त खर्च की भरपाई के लिए लगाती हैं। जब बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला ईंधन महंगा हो जाता है या बिजली खरीदने की लागत बढ़ती है, तो यह सरचार्ज बढ़ा दिया जाता है।
इसे समझना आसान है। मान लीजिए, बिजली बनाने में कोयला या गैस महंगी हो गई, तो बिजली कंपनी का खर्च बढ़ जाएगा। अब कंपनी इस बढ़े हुए खर्च को सीधे उपभोक्ता पर डाल देती है। यही वजह है कि बिजली बिल बढ़ोतरी होती है।






