विधानसभा में भारी हंगामे के बीच UCC बिल पास, समान नागरिक संहिता पारित करने वाला देश का चौथा राज्य बना मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को भारी हंगामे के बीच पारित कर दिया है, जिससे राज्य में बहुविवाह और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए नए नियम लागू होंगे।
UCC Bill Pass in MP

मध्य प्रदेश देश का चौथा ऐसा राज्य बन गया है, जिसने अपनी विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित कर दिया है। इस ऐतिहासिक कदम के साथ, राज्य में अब एक समान कानून व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जिसमें सभी धर्मों के लिए विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से संबंधित नियम एक जैसे होंगे।

राज्य में यूसीसी का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया 27 अप्रैल 2026 को न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समिति के साथ शुरू हुई थी। इस समिति में शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया था। समिति ने राज्य के प्रचलित कानूनों का गहन अध्ययन करने के साथ-साथ प्रदेशभर में जन-परामर्श बैठकों का आयोजन कर विभिन्न वर्गों से सुझाव भी एकत्र किए।

सोमवार को विधानसभा में पेश हुआ था यूसीसी विधेयक

सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026 पेश किया था। इस विधेयक में बहुविवाह पर रोक लगाने तथा सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान है। विधेयक के मुख्य प्रावधानों में तीन तलाक और निकाह हलाला को दंडनीय अपराध बनाना, बहुविवाह पर पूरी तरह से रोक लगाना और एक महीने के भीतर सहजीवन (लिव-इन रिलेशनशिप) का पंजीकरण नहीं कराने पर तीन महीने तक के कारावास का प्रावधान शामिल है। इससे एक दिन पहले, रविवार को मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने यूसीसी विधेयक के प्रारूप को अपनी मंजूरी दी थी।

सीएम मोहन यादव बोले, आज मध्य प्रदेश के लिए स्वर्णिम दिन

विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मीडिया से बातचीत में इसे एक स्वर्णिम दिन बताया। उन्होंने कहा कि सबके लिए एक समान कानून का पास होना देश की आधी आबादी के लिए बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद प्रदेश में एक से ज्यादा विवाह करना अपराध माना जाएगा, जिससे बहनों को होने वाले कष्ट से मुक्ति मिलेगी और आधी आबादी के हक का समर्थन होगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि लिव-इन रिलेशनशिप का दुरुपयोग करने वालों को पांच साल तक की सजा मिलेगी। सीएम यादव ने इस दौरान कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा हिंदू और मुसलमान में भेद करना क्यों चाहती है, उन्होंने भाइयों को लड़ाने का काम किया और देश का बंटवारा कांग्रेस की इसी मानसिकता के कारण हुआ।

बाबा साहब का सम्मान है तो यूसीसी का करें समर्थन: मोहन यादव

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के पाखंड पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बाबा साहब के लिए रत्तीभर सम्मान हो तो यूसीसी का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने 1959 का हवाला देते हुए बताया कि कांग्रेस ने इसी विधानसभा में किसानों की जमीन को लेकर समानता का कानून पास करवाया था। सीएम ने कहा कि कांग्रेस हमेशा वोट बैंक की राजनीति करती है, जबकि उनके सर्वेक्षण में 76 फीसदी मुस्लिम बहनों और 40 फीसदी मुस्लिम भाइयों ने यूसीसी का समर्थन किया है।

जो हिंदू हित की बात करेगा वही देश पर राज करेगा: मोहन यादव

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि राम से रहीम तक, रविंदर से रॉबिन और अमर से एंथोनी और अकबर तक देश एक संविधान से चले। उन्होंने विधानसभा में लिखे गए इस स्वर्णिम अध्याय को ऐतिहासिक दिन करार दिया और कहा कि भगवान के विधान में सब एक हैं, तो मनुष्य की नीति भी एक जैसी होनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर गुलामी के दौरान देश की संप्रभुता से समझौता करने का आरोप लगाया और विश्वास दिलाया कि आज के बाद मध्य प्रदेश में भेदभाव से मुक्ति मिलेगी। सदन में अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जय जय श्री राम के नारे भी लगाए और कहा कि जो हिंदू हित की बात करेगा वही देश पर राज करेगा। हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने मुस्लिम तुष्टिकरण बंद करने की बात भी कही।

यूसीसी बिल पास करने वाला देश का चौथा राज्य MP

मध्य प्रदेश यूसीसी बिल पास करने वाला देश का चौथा राज्य बन गया है। इससे पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम में यह बिल पास हो चुका है।

यूसीसी को लेकर सदन में कांग्रेस का हंगामा

हालांकि, मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सदन में भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच यह बिल पारित हुआ। विपक्ष ने इसका तीखा विरोध किया और वॉकआउट करने का भी प्रयास किया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन की कार्यवाही जारी रखते हुए विधेयक को पास घोषित कर दिया। सत्र की शुरुआत में ही सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल को चर्चा के लिए पटल पर रखा, जिसके तुरंत बाद विपक्ष हमलावर हो गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बिल का कड़ा विरोध करते हुए इसे विस्तृत समीक्षा के लिए प्रवर समिति (सेलेक्ट कमेटी) के पास भेजने की मांग की। सरकार ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई।

सरकार पूरी तरह से अड़ियल आरिफ मसूद

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि अमेंडमेंट पर चर्चा हुई थी और उन्हें अपने प्रस्ताव रखने का मौका दिया गया था, लेकिन दो घंटे बाद यह साफ हो गया कि सरकार पूरी तरह से अड़ियल थी। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो संविधान का पालन हो रहा था और न ही पार्लियामेंट्री नियमों का सम्मान हो रहा था, सिर्फ बिल पास करवाना ही एकमात्र मकसद था।

बाला बच्चन ने सरकार की मंशा पर खड़े किए सवाल

वहीं कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक आतिफ अकील और आरिफ मसूद ने इस बिल को सत्ता पक्ष का राजनीतिक एजेंडा करार दिया। कांग्रेस नेताओं ने संविधान के अनुच्छेद 29 का हवाला देते हुए अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की रक्षा का मुद्दा उठाया। तमाम विरोध और हंगामे के बीच सरकार ने सदन में अपने बहुमत के बल पर यूसीसी बिल को पारित करा लिया।

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