“मिर्ची बाबा” ने गौभक्तों संग निकाला पैदल मार्च, खून से लिखा पीएम-सीएम के नाम पत्र

“मिर्ची बाबा” ने गौभक्तों संग निकाला पैदल मार्च, खून से लिखा पीएम-सीएम के नाम पत्र

ग्वालियर, अतुल सक्सेना। महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्य नंद गिरी महाराज मिर्ची बाबा (Mirchi Baba) एक बार फिर गौमाता की दुर्दशा के खिलाफ प्रदर्शन किया।  उन्होंने बड़ी संख्या में गौभक्तों के साथ गोले का मंदिर गौशाला से फूलबाग तक पैदल मार्च किया। प्रशासन द्वारा प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद पैदल मार्च करने वाले मिर्ची बाबा  बैठ गए और फिर खून से लिखकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम पत्र प्रशासन को सौंपा।

पिछले लम्बे समय से गौरक्षा और गौमाता को दुर्दशा से बचाने के लिए महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्य नंद गिरी महाराज “मिर्ची बाबा” (Mirchi Baba) मध्यप्रदेश में आंदोलन कर रहे हैं। उनका फोकस विशेष तौर पर ग्वालियर (Gwalior) पर रहता है।  नगर निगम द्वारा संचालित गोले का मंदिर गौशाला में रहने वाली गौमाता की दुर्दशा को लेकर वे कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं।

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आज मंगलवार को “मिर्ची बाबा” ने गोले का मंदिर गौशाला से गौभक्तों के साथ फूलबाग चौराहे तक पैदल मार्च निकाला। जब उन्हें शहर में लागू धारा 144 का हवाला प्रशासन के अधिकारियों ने दिया तो वे भड़क गए और समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए और फिर अपना खून निकलवाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सिंह चौहान के नाम पत्र लिखकर प्रशासन को सौंपा।

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“मिर्ची बाबा” ने कहा कि गोले का मंदिर गौशाला में गौमाता बैठ नहीं पा रही है वहां बारिश में भीग रही हैं उन्हें खाने के लिए घास नहीं मिल रहा। “मिर्ची बाबा” ने मांग की की गौमाता को भरपेट घास के लिए 5 रुपये से कुछ नहीं होगा 50 रुपये दे सरकार और  गौमाता को राष्ट्रीय गौमाता घोषित किया जाये।  क्योंकि यदि राष्ट्रीय  गौमाता घोषित होगी तो होगी तो ये नहीं कटेगी।

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अनुमति  नहीं दिए दिए जाने के बावजूद प्रदर्शन कर कोरोना गाइड लाइन का उल्लंघन करने के सवाल पर “मिर्ची बाबा” ने भड़कते हुए कहा कि यहाँ नेताओं को अनुमति दी जाती है लेकिन एक संत महामंडलेश्वर को अनुमति नहीं दी जाती।  संतों को कार्यकर्ताओं को डराया जा रहा है लेकिन मैं डरने वाला नहीं हूँ। उन्होंने  कहा कि मैंने खून से पत्र इसलिए लिखा है कि शायद साधु और गौभक्तों के खून से लिखे पत्र से गौमाता की दुर्दशा दूर हो जाये ।

https://vimeo.com/604845821

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Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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