भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बिल्डिंग, साफ शौचालय, पीने के पानी और बेहतर क्लास रूम जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े, इसके लिए स्कूल शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी है। भवन विहीन स्कूलों के लिए बिल्डिंग की व्यवस्था की जाएगी, वहीं जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त क्लास रूम और छात्रावास भी बनाए जाएंगे। इसके साथ ही शिक्षकों की उपस्थिति, मिड-डे मील और स्कूलों के नियमित निरीक्षण से लेकर सोशल ऑडिट तक की व्यवस्था करने की तैयारी है।
स्कूल शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर तैयार कार्ययोजना में उन स्कूलों पर खास फोकस किया गया है, जिनके पास अपना भवन नहीं है या जिनकी कक्षाएं किसी दूसरे स्कूल की बिल्डिंग में चल रही हैं। ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर जरूरत के मुताबिक भवन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के जरिए बेहतर सुविधाओं के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने पर भी काम किया जा रहा है। इसी के साथ दूसरे सरकारी स्कूलों में मौजूद बुनियादी कमियों को दूर करने को भी कार्ययोजना में शामिल किया गया है।
शिक्षक आए या नहीं, नियमित होगा आकलन
स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति का नियमित आकलन किया जाएगा। इसके साथ पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी नजर रखी जाएगी। अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई और स्कूल से लगातार जोड़ने के लिए पैरेंट-टीचर मीटिंग (PTM) नियमित रूप से कराने की तैयारी है।
स्कूलों के पूर्व छात्रों को भी अपने पुराने विद्यालय से जोड़ने की योजना है, जिससे स्कूल में जरूरी सुविधाएं बढ़ाने में उनका सहयोग लिया जा सके। वहीं निजी स्कूलों के संचालन पर भी नजर रखने की बात कार्ययोजना में कही गई है।
स्कूलों का होगा सोशल ऑडिट
सरकारी स्कूलों के नियमित निरीक्षण के साथ अब सोशल ऑडिट की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का सहयोग लिया जाएगा। स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं और उनकी स्थिति की नियमित निगरानी की जाएगी।
स्कूल बिल्डिंग की रंगाई-पुताई, साफ पेयजल, इस्तेमाल करने लायक शौचालय और कक्षाओं में बेहतर ब्लैक बोर्ड जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने पर फोकस रहेगा। जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या के मुकाबले क्लास रूम कम हैं, वहां जरूरत के अनुसार अतिरिक्त कक्ष बनाने की व्यवस्था की जाएगी।
मिड-डे मील की भी होगी समीक्षा
बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन की व्यवस्था की भी समीक्षा की जाएगी। जहां कमियां सामने आएंगी, उन्हें दूर करने के निर्देश दिए जाएंगे। विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार छात्रावास सुविधाओं के विस्तार पर भी काम किया जाएगा।
बारिश या दूसरी खराब मौसमी परिस्थितियों के दौरान बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों में जरूरी इंतजाम करने की बात भी कार्ययोजना में शामिल है। इसके अलावा स्कूल परिसरों में बिना अनुमति वीडियो बनाने या दूसरी अनधिकृत गतिविधियों पर रोक लगाने की व्यवस्था की जाएगी।
सरकार का फोकस स्कूलों में केवल नई बिल्डिंग या कमरे बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। पढ़ाई की गुणवत्ता, शिक्षक की मौजूदगी, बच्चों की सुरक्षा, साफ-सफाई और अभिभावकों की भागीदारी को भी स्कूलों की निगरानी का हिस्सा बनाया जाएगा।






