MP में ऊंट-भेड़ों के लिए नया कॉरिडोर, 40 साल पुराने नियम बदले, पशुपालकों को बड़ा फायदा

एमपी-राजस्थान के बीच नया पशु कॉरिडोर खुलने से ऊंट-भेड़ पालकों को बड़ी राहत मिलेगी। 40 साल पुराने नियम बदलने के बाद अब जानवर आसानी से मध्य प्रदेश होते हुए छत्तीसगढ़ तक जा सकेंगे, जिससे पशुपालकों की आजीविका मजबूत होगी।
MP में ऊंट-भेड़ों के लिए नया कॉरिडोर

राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से हर साल हजारों ऊंट और भेड़ें चराई की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर निकलती हैं। पीढ़ियों से पशुपालक अपने जानवरों के साथ लंबी यात्राएं करते आए हैं, लेकिन रास्तों की सीमित संख्या और पुराने नियमों की वजह से उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब सरकार के नए फैसले ने इस पुरानी समस्या को काफी हद तक हल कर दिया है। करीब 40 साल पुराने नियमों में बदलाव के बाद अब जानवरों के लिए एक नया मार्ग खोल दिया गया है, जिससे पशुपालकों की यात्रा आसान होगी।

मध्य प्रदेश में खुला नया पशु कॉरिडोर

सरकार ने राजस्थान से आने वाले ऊंटों, भेड़ों और अन्य पशुओं के लिए नया कॉरिडोर मंजूर किया है। अब तक जानवर केवल चार तय मार्गों से ही राज्य में प्रवेश कर सकते थे, लेकिन अब पांचवां रास्ता भी खोल दिया गया है।

नए मार्ग के तहत पशु राजस्थान से मध्य प्रदेश में प्रवेश कर दमोह, नरसिंहपुर, कटनी, जबलपुर और डिंडौरी होते हुए अमरकंटक तक पहुंच सकेंगे। यहां से आगे उन्हें छत्तीसगढ़ की ओर जाने का भी रास्ता मिलेगा। इससे लंबी दूरी तय करने वाले पशुपालकों को बड़ी राहत मिलेगी। पहले कई पशुपालकों को लंबा चक्कर काटना पड़ता था, जिससे जानवरों और मालिकों दोनों को परेशानी होती थी। अब नया कॉरिडोर खुलने से यात्रा छोटी और सुरक्षित हो जाएगी।

पुराने चार मार्ग कौन से थे और अब क्या बदला?

अब तक राजस्थान से आने वाले पशुओं के लिए चार मुख्य मार्ग तय थे। इनमें से एक रास्ता सवाई माधोपुर से होते हुए श्योपुर, शिवपुरी, ग्वालियर और भिंड के रास्ते उत्तर प्रदेश तक जाता था।

दूसरा मार्ग शाहबाद से गुना और अशोकनगर के रास्ते आगे बढ़ता था। तीसरा रास्ता राजगढ़ और सिरोंज होते हुए चंदेरी की तरफ जाता था। इसके अलावा गुजरात से आने वाले पशुओं के लिए झाबुआ, धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर तक मार्ग खुला था। अब पांचवें मार्ग के जुड़ने से यात्रा का दबाव अलग-अलग रास्तों पर बंट जाएगा और पशुपालकों को बेहतर विकल्प मिलेगा।

छत्तीसगढ़ तक आसान होगी पशुओं की निकासी

नया कॉरिडोर खुलने से अब पशु मध्य प्रदेश में रुकने के बाद सीधे छत्तीसगढ़ की ओर भी जा सकेंगे। इससे उन पशुपालकों को फायदा होगा जो लंबी दूरी तक चराई के लिए जाते हैं।

छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में जंगल और खुले मैदान हैं, जहां जानवरों के लिए पर्याप्त चारा मिलता है। नए मार्ग से पशुपालकों को बार-बार रास्ता बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह कदम राज्यों के बीच बेहतर तालमेल का भी संकेत माना जा रहा है, जिससे पशुपालकों की पारंपरिक जीवनशैली को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर क्या असर पड़ेगा?

पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऊंट, भेड़ और बकरियां लाखों परिवारों की आजीविका का आधार हैं। नया कॉरिडोर खुलने से पशुपालकों की आय बढ़ने की उम्मीद है।

जानवरों को बेहतर चराई क्षेत्र मिलने से उनकी सेहत अच्छी रहेगी और दूध, ऊन तथा अन्य उत्पादों का उत्पादन भी बढ़ेगा। इससे स्थानीय बाजारों में व्यापार को भी फायदा मिलेगा ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे दुकानदार, चारा व्यापारी और पशु व्यापार से जुड़े लोग भी इस फैसले से लाभान्वित होंगे।

Bhawna Choubey
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