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नागपंचमी के अवसर पर भगवान नागचंद्रेश्वर ने दिए भक्तों को दर्शन, आज रात 12 बजे फिर बंद हो जाएंगे मंदिर के पट

Written by:Rishabh Namdev
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आज देशभर में नाग पंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है। इस त्योहार का इंतजार भक्तों को इसलिए भी होता है क्योंकि इस दिन भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन का अवसर मिलता है। महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट साल में सिर्फ इसी दिन खोले जाते हैं।
नागपंचमी के अवसर पर भगवान नागचंद्रेश्वर ने दिए भक्तों को दर्शन, आज रात 12 बजे फिर बंद हो जाएंगे मंदिर के पट

उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट रात 12:00 बजे खोले गए। बड़ी संख्या में भक्तों ने भगवान के दर्शन किए। सबसे पहले महानिर्वाणी अखाड़ा के विनीत गिरी महाराज द्वारा त्रिकाल पूजन किया गया, फिर बाबा नागचंद्रेश्वर ने भक्तों को दर्शन दिए। भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। दरअसल, भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन का मौका भक्तों को साल में सिर्फ एक बार ही मिलता है।

ऐसे में आज भी नाग पंचमी के मौके पर हर साल की तरह इस साल भी श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खोले गए। यह पट सिर्फ एक दिन यानी 24 घंटे के लिए ही खोले जाते हैं। यही कारण है कि इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए

नाग पंचमी के शुभ अवसर पर आज रात 12:00 बजे तक ही श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। इस दौरान भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। हालांकि इसके लिए प्रशासन पूरी तरह से तैयार है। श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए भीड़ को संभालने और सुरक्षा के लिए 200 वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा 2500 कर्मचारी, 1800 पुलिसकर्मी और 560 सीसीटीवी कैमरे भी सुरक्षा के मद्देनज़र लगाए गए हैं। साल में सिर्फ नाग पंचमी के दिन ही भगवान नागचंद्रेश्वर के पट खोले जाते हैं, यही कारण है कि इसे बेहद दुर्लभ अवसर माना जाता है।

भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा 11वीं शताब्दी की

वहीं आज दोपहर 12:00 बजे फिर से महानिर्वाणी अखाड़ा द्वारा भगवान नागचंद्रेश्वर का पूजन किया जाएगा। इसके बाद भगवान महाकाल की शाम की आरती होने के बाद एक बार फिर अंतिम पूजा पुजारी और पुरोहितों द्वारा की जाएगी। इसके बाद रात 12:00 बजे भगवान नागचंद्रेश्वर के पट फिर से बंद कर दिए जाएंगे। फिर अगली नाग पंचमी के अवसर पर ही यह पट खोले जाएंगे। नागचंद्रेश्वर मंदिर में मौजूद भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा 11वीं शताब्दी की बताई जाती है। इतिहासकारों के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण राजा भोज ने 1050 ई. के लगभग करवाया था। यह भी माना जाता है कि यह दुर्लभ प्रतिमा नेपाल से लाई गई थी।

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Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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