
नर्मदापुरम वन मंडल के इटारसी रेंज की छिपीखापा बीट में ढाई करोड़ रुपये कीमत के सागौन (गोल्डन टीक) के 1290 पेड़ अवैध रूप से काट दिए गए। यह वही जंगल है जहां 3rd A क्वालिटी के सागौन खड़े थे और अब वहां केवल ठूंठ बचे हैं। सवाल यह है कि महीनों तक चलती रही यह कटाई आखिर जिम्मेदार अफसरों की नज़रों से कैसे बची?
चेतावनी को क्यों किया गया नज़रंदाज़
मुख्य वन संरक्षक नर्मदापुरम ने 1 अक्टूबर 2024, 18 फरवरी 2025 और 5 मई 2025 को लगातार पत्र लिखकर डीएफओ मयंक गुर्जर को सचेत किया था कि छिपीखापा क्षेत्र में अवैध कटाई हो रही है। इसके बावजूद न तो गश्त बढ़ाई गई और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई।
जब गुर्जर द्वारा शिकायतों को अनसुना किया गया तब शिकायत प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख बी.एन. अंबाड़े तक पहुँची। उनके निर्देश पर पीसीसीएफ (संरक्षण) विभास कुमार ठाकुर ने राज्य स्तरीय उड़न दस्ते को मौके पर भेजा।
उड़न दस्ते की रिपोर्ट से मची विभाग में खलबली
उड़न दस्ते ने 9 से 14 सितम्बर 2025 तक लगातार छिपीखापा बीट का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने इलाके में फैले ठूंठों की गिनती की और पाया कि कुल 1290 पेड़ काटे जा चुके हैं, जिनमें 1242 सागौन और 38 सतकटा शामिल थे। जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से बड़ी संख्या में ठूंठ ताजे थे, जिससे साफ होता है कि कटाई हाल ही के महीनों में हुई है। उड़न दस्ते ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया कि इस अवैध कटाई से विभाग को करीब ढाई करोड़ रुपये की हानि हुई है।
डायरी का पन्ना और बड़ा विरोधाभास (Narmadapuram News)
जब मामले की छानबीन की गई तब डीएफओ मयंक गुर्जर की डायरी में दर्ज 5 अक्टूबर 2024 का जो नोट मिला उसने पूरे मामले और गहन बना दिया। डायरी में साफ लिखा था कि गुर्जर द्वारा 5/10/24 को छिपीखापा बीट (RF-112) का निरीक्षण किया था। उस निरीक्षण में उन्होंने बाघ और तेंदुए के पगमार्ग का जिक्र किया, लेकिन कटाई का कोई उल्लेख नहीं किया।
अब सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि या तो कटाई 5 अक्टूबर 2024 के बाद बड़े पैमाने पर हुई, या फिर करोड़ों की सागौन चोरी को जानबूझकर छिपाने का प्रयास किया गया है।
अशोक कुमार की आपत्ति और भ्रम
जब उड़न दस्ते की रिपोर्ट सामने आई तो नर्मदापुरम के वरिष्ठ अधिकारी अशोक कुमार ने उस पर आपत्ति जताई है। आपत्ति के तौर पर दिया गया उनका यह बयान विभागीय हलकों में कहीं न कहीं वरिष्ठ अधिकारियों को भ्रमित करने एवं स्वयं की वनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी से बचाव के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
अब बड़ा सवाल जो सामने आ रहा है वह यह है कि जब तीन-तीन बार लिखित चेतावनी दी गई, तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जब उड़न दस्ते ने ताजा ठूंठ और ढाई करोड़ की हानि दर्ज की, तब इस पर उच्च अधिकारी आपत्ति क्यों जता रहे हैं?
और अगर इंदौर सड़क हादसे में SP को ज़िम्मेदार मानकर अटैच किया जा सकता है तो इस मामले में अब तक किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ कोई भी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
ख़बर बिंदुओं में
1 अक्टूबर 2024 – मुख्य वन संरक्षक नर्मदापुरम ने पहली बार डीएफओ मयंक गुर्जर को अवैध कटाई रोकने के लिए सचेत किया।
5 अक्टूबर 2024 – डीएफओ ने छिपीखापा बीट का निरीक्षण अपनी डायरी में दर्ज किया; बाघ-तेंदुए के पगमार्ग का जिक्र किया लेकिन कटाई का उल्लेख नहीं।
18 फरवरी 2025 – दूसरी बार चेतावनी दी गई, बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हुई।
5 मई 2025 – तीसरी बार पत्र लिखकर कटाई रोकने के निर्देश दिए गए।
9 से 14 सितम्बर 2025 – राज्य स्तरीय उड़न दस्ते ने छिपीखापा बीट का निरीक्षण कर 1290 ठूंठ गिने और ढाई करोड़ रुपये की हानि की रिपोर्ट सौंपी।
सितम्बर 2025 (बाद में) – वरिष्ठ अधिकारी अशोक कुमार ने उड़न दस्ते की रिपोर्ट पर आपत्ति जताई, जिसे विभागीय हलकों में वरिष्ठ अधिकारियों को भ्रमित करने का प्रयास माना गया।

