MP के सभी टाइगर रिज़र्व में नाइट सफारी पर रोक! सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मध्य प्रदेश के सभी 9 टाइगर रिज़र्व में नाइट सफारी पर रोक लगा दी गई है। यह निर्णय वन्यजीवों की सुरक्षा, उनके प्राकृतिक व्यवहार और संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है।
MP Tiger Reserve

रात की ठंडक में जंगल का रोमांच महसूस करने वाले पर्यटकों के लिए यह खबर अचानक आई है पर पूरे प्रदेश में इसकी चर्चा गूंज रही है। मध्य प्रदेश, जिसे टाइगर स्टेट कहा जाता है, वहां अब रात के अंधेरे में टाइगर की गहरी दहाड़ें सुनने या लाल चमकती आंखों को देखने का मौका नहीं मिलेगा। 1 दिसंबर से सभी टाइगर रिज़र्व में नाइट सफारी अब पूरी तरह बंद कर दी गई है। यह फैसला अचानक नहीं, बल्कि न्यायिक आदेश और संरक्षण विशेषज्ञों की चेतावनियों के बाद लिया गया है।

पिछले कुछ वर्षों से नाइट सफारी को लेकर एक बहस चल रही थी, क्या यह पर्यटन को बढ़ावा देती है या वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार में खलल डालती है? सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अब यह स्पष्ट हो चुका है कि संरक्षण किसी भी पर्यटन लाभ से बड़ा है। इस फैसले के बाद पर्यटकों, स्थानीय अर्थव्यवस्था और वन प्रशासन पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है।

MP में Night Safari बंद क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश?

17 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया जिसमें कहा गया कि नाइट सफारी वन्यजीवों के प्राकृतिक जीवन चक्र को बाधित कर सकती है। जंगली जानवर अंधेरे में न सिर्फ भोजन तलाशते हैं, बल्कि अपने क्षेत्र का निरीक्षण और शिकार जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियाँ भी करते हैं। इस आदेश के बाद मध्य प्रदेश मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक (CWLW) सुभरंजन सेन ने प्रदेश के सभी टाइगर रिज़र्व को निर्देश भेजकर स्पष्ट कहा कि 1 दिसंबर 2025 से नाइट सफारी तत्काल प्रभाव से बंद की जाए।

इस आदेश में इन बिंदुओं पर जोर दिया गया

अंधेरे में वाहनों की लाइट से जानवरों के व्यवहार में बदलाव आ रहा था, शावकों के साथ रहने वाली बाघिनें अधिक सतर्क हो जाती थी, शिकार श्रृंखला रात में अधिक सक्रिय रहती है, वाहन और मानवीय हस्तक्षेप से वन्यजीवों में तनाव और प्रवृत्ति संबंधी बदलाब दिखे इससे पहले NTCA (National Tiger Conservation Authority) भी नाइट सफारी को रोकने के निर्देश दे चुका था।

क्यों बंद हुई नाइट सफारी?

1. बाघों की गतिविधि का 70% हिस्सा रात में होता है
बाघ दिन में आराम करते हैं और रात में शिकार करने निकलते हैं। वाहनों की आवाज़, हेडलाइट्स और कैमरों की फ्लैश लाइट ने इस गतिविधि में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया था।

2. बाघिनें बच्चों को लेकर असुरक्षित महसूस करती हैं
विशेषज्ञों ने बताया कि बाघिनें नाइट सफारी के दौरान अपने शावकों को सुरक्षित जगह बदलने को मजबूर होती थीं इससे उनके जीवन पर खतरा बढ़ता है।

3. CCTV, वाहन और मानवीय आवाज़ का बढ़ता दबाव
रात में सामान्य सन्नाटा प्राकृतिक जंगल का हिस्सा है। नाइट सफारी के दौरान यह संतुलन बिगड़ रहा था।

4. जानवरों के माइग्रेशन पैटर्न पर असर
हिरण, सांभर, चीतल जैसे शाकाहारी जानवर रात में जंगली मार्ग बदलते हैं। लाइट और आवाज़ के कारण उनका रूट प्रभावित होता था। यह फैसला जंगल के इकोसिस्टम को सुरक्षित रखने के दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

  1. MP के कौन-कौन से Tiger Reserve में नाइट सफारी बंद?
  2. बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व
  3. कान्हा टाइगर रिज़र्व
  4. पेंच टाइगर रिज़र्व
  5. सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व
  6. संजय-दुबरी टाइगर रिज़र्व
  7. पन्ना टाइगर रिज़र्व
  8. नोराडेही टाइगर रिज़र्व
  9. रालामांडल टाइगर रिज़र्व
  10. भीमकुंड टाइगर रिज़र्व

2020 में बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में सबसे पहले नाइट सफारी शुरू हुई थी, जहां शाम 7 से रात 10 बजे तक पर्यटकों को प्रवेश मिलता था। अब यह रोमांचक सफर बंद हो गया है।

Bhawna Choubey
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