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45 साल बाद MP में लौटी जंगली भैंसें: काजीरंगा से कान्हा पहुंचीं, आज CM मोहन करेंगे रिहा

Written by:Bhawna Choubey
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मध्य प्रदेश के कान्हा में 45 साल बाद जंगली भैंसों की वापसी से वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर है। काजीरंगा से आए इन भैंसों को आज छोड़ा जाएगा, जिससे जैव विविधता को नई जिंदगी मिलेगी।
45 साल बाद MP में लौटी जंगली भैंसें: काजीरंगा से कान्हा पहुंचीं, आज CM मोहन करेंगे रिहा

आज MP के जंगलों के लिए एक खास दिन है। लंबे समय से जिस पल का इंतजार था, वह आखिरकार आ ही गया। लगभग 45 साल बाद कान्हा के जंगलों में फिर से जंगली भैंसों की मौजूदगी दर्ज होने जा रही है।

यह सिर्फ एक वन्यजीव की वापसी नहीं, बल्कि प्रकृति के संतुलन की ओर एक बड़ा कदम है। जब ये जंगली भैंसें कान्हा की धरती पर कदम रखेंगी, तो यह नजारा न केवल वन विभाग के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का पल होगा।

45 साल बाद कान्हा में जंगली भैंसों की वापसी

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिज़र्व में जंगली भैंसों की वापसी एक ऐतिहासिक घटना मानी जा रही है। करीब 45 साल पहले यह प्रजाति यहां से पूरी तरह खत्म हो गई थी। अब असम के काज़ीरंगा नेशनल पार्क से चार जंगली भैंसों को यहां लाया गया है, जिन्हें आज औपचारिक रूप से छोड़ा जाएगा।

सीएम मोहन यादव करेंगे रिलीज

मुख्यमंत्री मोहन यादव आज बालाघाट दौरे पर पहुंचकर इन जंगली भैंसों को ‘सॉफ्ट रिलीज’ प्रक्रिया के तहत जंगल में छोड़ेंगे। सॉफ्ट रिलीज का मतलब है कि शुरुआत में इन भैंसों को एक सुरक्षित और नियंत्रित बाड़े में रखा जाएगा, ताकि वे नए माहौल में खुद को ढाल सकें। इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। यह तरीका वन्यजीव संरक्षण में काफी प्रभावी माना जाता है, क्योंकि इससे जानवरों के जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है।

क्यों जरूरी थी जंगली भैंसों की वापसी?

कान्हा के जंगलों में जंगली भैंसों का विलुप्त होना पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ा नुकसान था। ये भैंसें जंगल के संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। उनकी वापसी से न सिर्फ जैव विविधता बढ़ेगी, बल्कि जंगल के प्राकृतिक चक्र को भी मजबूती मिलेगी। वन विभाग के अनुसार, यह परियोजना लंबे समय से योजना में थी और अब इसे जमीन पर उतारा जा रहा है।

50 जंगली भैंसों को बसाने की बड़ी योजना

वन विभाग ने सिर्फ चार भैंसों को लाकर ही नहीं रुकने का फैसला किया है। आने वाले समय में कान्हा में करीब 50 जंगली भैंसों को बसाने की योजना बनाई गई है। यह योजना सफल होती है, तो कान्हा एक बार फिर इस प्रजाति का सुरक्षित घर बन सकता है। इससे न केवल वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यटन के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खुलेंगी।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा

जंगली भैंसों की वापसी से कान्हा टाइगर रिजर्व का आकर्षण और बढ़ेगा। पर्यटक अब बाघों के साथ-साथ इस दुर्लभ प्रजाति को भी देखने आ सकेंगे।
इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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