वर्ल्ड कैंसर डे पर चिंताजनक तस्वीर, एमपी में युवा तेजी से हो रहे कैंसर के शिकार

मध्य प्रदेश में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और अब युवा पीढ़ी भी इसकी चपेट में आ रही है। नई रिपोर्टों ने स्वास्थ्य व्यवस्था और लोगों की जीवनशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
world cancer day

हर साल 4 फरवरी को वर्ल्ड कैंसर डे मनाया जाता है, ताकि दुनिया भर के लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके। इस दिन का मकसद लोगों को समय पर जांच, सही इलाज और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है, क्योंकि सही समय पर पता चलने पर कैंसर का इलाज संभव है।

इसी बीच मध्य प्रदेश से सामने आई नई रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश में कैंसर अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई, बल्कि युवा पीढ़ी भी तेजी से इसकी चपेट में आ रही है। अस्पतालों में कम उम्र के मरीजों की बढ़ती संख्या यह संकेत दे रही है कि यह खामोश खतरा अब हर परिवार के दरवाजे तक पहुंच चुका है।

मध्य प्रदेश में कैंसर क्यों बनता जा रहा है बड़ी समस्या?

रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में अब कुल बीमारियों के बोझ का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-संचारी रोगों का हो गया है। यानी ऐसी बीमारियां जो एक व्यक्ति से दूसरे को नहीं फैलतीं, लेकिन जीवनशैली और पर्यावरण से जुड़ी होती हैं। इन गैर-संचारी रोगों में कैंसर सबसे खतरनाक साबित हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि हर 10 मौतों में से एक मौत की वजह अब कैंसर बन रही है। इसका मतलब यह है कि कैंसर अब धीरे-धीरे आम बीमारी बनती जा रही है, जो समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रही है।

युवा पीढ़ी क्यों आ रही कैंसर की चपेट में?

पहले कैंसर को उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता था लेकिन अब स्थिति बदल रही है। एम्स भोपाल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के अध्ययन में पाया गया कि युवा मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसके पीछे कई कारण माने जा रहे हैं बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड और जंक फूड का ज्यादा सेवन, धूम्रपान और शराब की बढ़ती आदत, तनाव और नींद की कमी, शारीरिक गतिविधि की कमी, डॉक्टरों का कहना है कि मोबाइल और लैपटॉप के सामने घंटों बैठने वाली जीवनशैली भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करती है।

प्रदेश में कौन से कैंसर के मामले ज्यादा?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य प्रदेश में कुछ कैंसर तेजी से बढ़ते देखे जा रहे हैं महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर, पुरुषों में मुंह और फेफड़ों का कैंसर, पेट और आंत से जुड़े कैंसर, लिवर और गले के कैंसर के मामले, मुंह का कैंसर खासतौर पर गुटखा, तंबाकू और धूम्रपान करने वालों में ज्यादा पाया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में यह समस्या और गंभीर है।

देर से जांच कराना भी बड़ा कारण

कैंसर के मामलों में सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग शुरुआत के लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। जब बीमारी बढ़ जाती है तब अस्पताल पहुंचते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि अगर कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में लग जाए तो इलाज संभव है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। लेकिन देर होने पर इलाज मुश्किल और महंगा दोनों हो जाता है। गांवों में जागरूकता की कमी और जांच सुविधाओं की दूरी भी बड़ी समस्या है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
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