अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम बदला, अब ‘अहिल्यानगर’ के नाम से जाना जाएगा

महाराष्ट्र में अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम आधिकारिक तौर पर बदल दिया गया है। अब यह स्टेशन लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के सम्मान में ‘अहिल्यानगर’ के नाम से जाना जाएगा।
अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम बदला, अब ‘अहिल्यानगर’ के नाम से जाना जाएगा

महाराष्ट्र में अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम आधिकारिक तौर पर बदल दिया गया है। अब यह स्टेशन लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के सम्मान में ‘अहिल्यानगर’ के नाम से जाना जाएगा। इस फैसले के साथ ही राज्य सरकार ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को सम्मान देने का संदेश दिया है।

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस नाम परिवर्तन को मंजूरी दी थी। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘अहिल्यानगर’ करने की अधिसूचना जारी की। रेलवे ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि अब यह स्टेशन आधिकारिक रूप से नए नाम से दर्ज होगा।

अहमदनगर रेलवे स्टेशन का नाम बदला

मध्य रेलवे की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि स्टेशन का नाम बदलने के बावजूद उसका कोड पहले जैसा ही रहेगा। पहले जिसे ‘ANG’ कोड के साथ अहमदनगर कहा जाता था, अब वही स्टेशन ‘अहिल्यानगर’ के नाम से जाना जाएगा। रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल नाम बदला गया है, स्टेशन कोड या यात्रियों की यात्रा संबंधी व्यवस्था पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

इससे पहले महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि शहर का नाम जब बदला गया है तो रेलवे स्टेशन का नाम भी उसी अनुरूप बदलना चाहिए। शहर का नाम 4 अक्टूबर 2024 को ही बदलकर ‘अहिल्यानगर’ कर दिया गया था। इसके बाद से ही स्थानीय संगठनों और नागरिकों की ओर से रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग उठ रही थी।

इतिहास पर नजर डालें तो मजलक अहमद की स्थापना 1494 ईस्वी में हुई थी और निजामशाही शासनकाल में इस शहर को उनके नाम से जोड़ा गया। बाद में पेशवा शासन के अंत के बाद 1822 में अहिल्यानगर जिले का गठन किया गया। उस समय इसकी सीमाएं नासिक जिले के वानी से लेकर सोलापुर जिले के करमाला तक फैली थीं। 1869 में नासिक और सोलापुर जिलों के गठन के बाद वानी और करमाला को अलग कर दिया गया। बाद में 1981 में अहिल्यानगर जिले को पुणे प्रभाग से हटाकर नासिक राजस्व विभाग में शामिल कर दिया गया। अब रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर इस ऐतिहासिक विरासत को औपचारिक मान्यता दी गई है।

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