महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव से पहले मुंबई में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सभी दल जनता से जुड़े मुद्दों को उठाकर एक-दूसरे पर प्रहार कर रहे हैं। इसी कड़ी में मुंबई यूथ कांग्रेस ने अनोखे अंदाज में विरोध दर्ज कराया। यूथ कांग्रेस के वर्किंग प्रेजिडेंट सुफियान हैदर ने जोगेश्वरी इलाके की अजित ग्लास रोड का नाम बदलकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस रोड रख दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस सड़क पर जितने गड्ढे हैं, उतने ही गड्ढे फडणवीस सरकार की नीतियों में देखने को मिलते हैं। इस व्यंग्यात्मक प्रदर्शन ने चुनावी माहौल में हलचल मचा दी।
हैदर ने आरोप लगाया कि बीएमसी चुनाव पिछले चार साल से नहीं हुए हैं और पूरे अधिकार मुख्यमंत्री के पास हैं, इसके बावजूद मुंबई की सड़कों की हालत बेहद खराब बनी हुई है। उन्होंने बताया कि बीएमसी का सालाना बजट 74 हजार करोड़ रुपये है, जिसमें सड़कों के लिए 3,500 करोड़, पुलों के लिए 4,000 करोड़ और प्रत्येक वार्ड को गड्ढे भरने के लिए 50 लाख रुपये का प्रावधान किया जाता है। इतने बड़े बजट के बावजूद मुंबईकर रोजाना गड्ढों से भरी सड़कों पर सफर करने को मजबूर हैं। हैदर ने सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बाद भी शहर की सड़कों की हालत क्यों नहीं सुधरती।
बीएमसी चुनाव से पहले कांग्रेस का अनोखा प्रदर्शन
युवक कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि बीएमसी को सड़क निर्माण के समय स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करनी चाहिए ताकि सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एशिया के अन्य देश जैसे चीन और जापान, जहां जनसंख्या भी कम नहीं है, विश्वस्तरीय सड़कें बना सकते हैं, तो मुंबई में ऐसा क्यों संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मुंबई जैसी महानगर में खराब सड़कों की स्थिति सरकार और बीएमसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
हैदर ने आगे आरोप लगाया कि बीएमसी और राज्य सरकार की लापरवाही के कारण हर साल मुंबई की सड़कों पर हादसे होते हैं और कई लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। उनका कहना था कि चुनाव आते ही नेताओं को विकास के वादे याद आते हैं, लेकिन असलियत में जनता को केवल गड्ढों और समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार और बीएमसी सच में जनता के हितों को प्राथमिकता देती, तो आज मुंबई की सड़कें बेहतर स्थिति में होतीं। बीएमसी चुनाव से पहले इस तरह का विरोध प्रदर्शन साफ दिखाता है कि सड़क का मुद्दा इस बार चुनाव में बड़ा राजनीतिक हथियार बनने जा रहा है।





