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झूठी कहानी बनाकर… शरद पवार के चुनावी दावे पर फडणवीस का पलटवार

Written by:Neha Sharma
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार के हालिया दावे पर तीखा जवाब दिया। पवार ने कहा था कि 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले दो लोगों ने उनसे संपर्क कर 288 में से 160 सीटें जिताने की गारंटी दी थी।
झूठी कहानी बनाकर… शरद पवार के चुनावी दावे पर फडणवीस का पलटवार

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार के हालिया दावे पर तीखा जवाब दिया। पवार ने कहा था कि 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले दो लोगों ने उनसे संपर्क कर 288 में से 160 सीटें जिताने की गारंटी दी थी। इस पर फडणवीस ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि बड़े नेताओं के पास चुनाव को प्रभावित करने के ऐसे प्रस्ताव लेकर लोग आते हैं, लेकिन न तो वे पुलिस में शिकायत करते हैं, न चुनाव आयोग को सूचित करते हैं, और न ही कोई कार्रवाई करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया क्या इसका मतलब यह है कि आपने इनका इस्तेमाल कर के देख लिया था?

शरद पवार के चुनावी दावे पर फडणवीस का पलटवार

फडणवीस ने कहा कि अगर ऐसे लोग वाकई पवार के पास आए थे तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई? उन्होंने पवार के बयान को महज “स्टोरी” बनाने की कोशिश बताया। चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर भरोसा जताते हुए फडणवीस ने कहा कि आयोग कई बार खुली चुनौती दे चुका है कि कोई ईवीएम हैक करके दिखाए, लेकिन कोई नहीं कर पाया। उन्होंने झूठे आरोप लगाकर जनादेश का अपमान बंद करने की नसीहत दी और कहा कि चुनावी हार को बहानेबाजी से ढंका नहीं जा सकता।

मुख्यमंत्री ने पवार पर ओबीसी समाज के मुद्दे पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में झटका लगने के बाद ही पवार को ओबीसी समाज की याद आई है। फडणवीस के अनुसार, पवार ने ओबीसी समुदाय को दरकिनार किया और उनके आरक्षण पर संकट के समय दोहरी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि समाज इन सब बातों को भली-भांति जानता है और यह सब अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए किया जा रहा है।

शरद पवार ने अपने बयान में कहा था कि विधानसभा चुनाव से पहले दो लोग उनसे मिलने आए थे, जिन्होंने दावा किया कि वे चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं और 160 सीटें जिताने की गारंटी दे सकते हैं। पवार के मुताबिक, यह सुनकर उन्हें आश्चर्य हुआ और उन्होंने इन लोगों से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मुलाकात कराई, ताकि वे अपना विचार रख सकें। हालांकि, पवार और राहुल गांधी दोनों इस बात पर सहमत हुए कि इस तरह के प्रस्ताव पर ध्यान देना सही नहीं है, क्योंकि यह उनके राजनीतिक तरीकों के खिलाफ है।