Hindi News

गरबा विवाद पर अजित पवार गुट का बयान, कहा- धर्म के नाम पर भेदभाव ठीक नहीं

Written by:Neha Sharma
Published:
Last Updated:
गरबा विवाद के बीच महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मच गई है। अजित पवार गुट की एनसीपी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा है कि धर्म के नाम पर किसी को प्रताड़ित करना उचित नहीं है।
गरबा विवाद पर अजित पवार गुट का बयान, कहा- धर्म के नाम पर भेदभाव ठीक नहीं

गरबा विवाद के बीच महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मच गई है। अजित पवार गुट की एनसीपी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा है कि धर्म के नाम पर किसी को प्रताड़ित करना उचित नहीं है। एनसीपी के पूर्व सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद परांजपे ने कहा कि भारत एक सहिष्णु देश है, जहां विभिन्न धर्मों के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मुस्लिम त्योहारों में हिंदू शामिल होते हैं और तब कभी किसी हिंदू से उसकी धार्मिक पहचान पूछने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर जोर दिया कि महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी है।

दरअसल, विवाद की शुरुआत 21 सितंबर को हुई, जब विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने बयान जारी कर कहा कि गरबा के पंडालों में सिर्फ हिंदुओं को ही प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए। VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने कहा था कि गरबा केवल एक नृत्य नहीं बल्कि देवी की पूजा का एक रूप है। उन्होंने तर्क दिया कि मुसलमान मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते, इसलिए केवल वही लोग इसमें भाग लें जो इन धार्मिक अनुष्ठानों में आस्था रखते हों। इस बयान के बाद से ही गरबा आयोजन पर धार्मिक रंग चढ़ने लगा है और सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।

गरबा विवाद पर अजित पवार गुट का बयान

अजित पवार गुट की एनसीपी ने इस मुद्दे पर कहा कि गरबा के आयोजन में धार्मिक पहचान की जांच करना या किसी धर्म के लोगों को इसमें शामिल होने से रोकना गलत है। पार्टी प्रवक्ता आनंद परांजपे ने कहा, “गरबा के आयोजनों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। महाराष्ट्र पुलिस और मुंबई पुलिस इस पर पूरी तैयारी करेगी। लेकिन इस त्योहार को धार्मिक रंग देकर किसी समुदाय को बाहर रखना उचित नहीं है।” उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए ऐसे आयोजनों में सभी समुदायों की सहभागिता का सम्मान होना चाहिए।

एनसीपी नेता ने आगे कहा कि अगर किसी भी आयोजन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है तो पुलिस और प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि त्योहारों को विवाद का कारण बनाने की बजाय उन्हें सामाजिक और सांस्कृतिक एकता के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। परांजपे ने दोहराया कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में सभी धर्मों और समुदायों का आपसी सम्मान ही देश की ताकत है।