
भारत और पाकिस्तान के बीच 14 सितंबर को होने वाले एशिया कप 2025 के मैच को लेकर राजनीति गरमा गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस मैच का कड़ा विरोध किया है और कहा है कि पार्टी इसके खिलाफ आंदोलन करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी इस खेल आयोजन पर आंख मूंदकर बैठी है, जबकि देश आतंकवाद के जख्म अब तक नहीं भूला है। राउत ने गुरुवार (11 सितंबर) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पहलगाम हमले में 26 महिलाओं का सिंदूर मिट गया, उनके परिवारों का दर्द अभी तक खत्म नहीं हुआ, फिर भी भारत-पाकिस्तान मैच का आयोजन हो रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी मंत्रियों के बच्चे अबू धाबी में यह मैच देखने जरूर जाएंगे और इसे उन्होंने सीधा देशद्रोह करार दिया।
संजय राउत ने शिवसेना (UBT) की ओर से आंदोलन का भी ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि रविवार को पार्टी की महिला आघाडी “सिंदूर रक्षा” आंदोलन करेगी। इसके तहत महाराष्ट्र की हजारों महिलाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घर-घर से सिंदूर भेजेंगी। राउत ने कहा कि यह आंदोलन उन 26 महिलाओं के सम्मान में होगा जिनके पति पहलगाम हमले में आतंकियों की गोली का शिकार हुए थे। उन्होंने “सिंदूर के सम्मान में शिवसेना मैदान में” का नारा दिया। राउत ने इस मुद्दे को और गंभीर बनाने के लिए पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले से जुड़ी एक वायरल तस्वीर भी शेयर की।
भारत-पाकिस्तान मैच पर गरमाई सियासत
दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2024 को आतंकियों ने 26 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस हमले के तुरंत बाद सुरक्षाबलों ने व्यापक अभियान चलाया। 28 जुलाई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत इस हमले में शामिल सभी आतंकियों को मार गिराया गया। इसके अलावा सेना ने पाकिस्तान और पीओके में एयर स्ट्राइक करते हुए 100 से अधिक आतंकियों को भी ढेर कर दिया था। यह ऑपरेशन पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त कार्रवाई का बड़ा उदाहरण माना गया था।
अब जब भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप का मैच 14 सितंबर को दुबई में होने वाला है, तो विपक्षी दलों ने इस पर कड़ा विरोध जताया है। विपक्ष का कहना है कि आतंक के खिलाफ चल रही जंग के बीच पाकिस्तान के साथ खेलना सही संदेश नहीं देता। वहीं, संजय राउत जैसे नेता इसे भावनात्मक मुद्दे से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में भारत-पाकिस्तान मुकाबला केवल क्रिकेट का खेल नहीं, बल्कि राजनीतिक और भावनात्मक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
