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मुंबई हाईकोर्ट ने किया साफ, पर्युषण पर्व पर नौ दिन नहीं बंद रहेंगे बूचड़खाने, सिर्फ दो दिन रोक

Written by:Neha Sharma
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जैन समाज के पर्युषण पर्व के मौके पर बूचड़खाने पूरी तरह बंद रखने की मांग पर मुंबई हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। बुधवार को अदालत ने स्पष्ट किया कि इस साल सभी नौ दिन बूचड़खाने बंद नहीं रहेंगे।
मुंबई हाईकोर्ट ने किया साफ, पर्युषण पर्व पर नौ दिन नहीं बंद रहेंगे बूचड़खाने, सिर्फ दो दिन रोक

जैन समाज के पर्युषण पर्व के मौके पर बूचड़खाने पूरी तरह बंद रखने की मांग पर मुंबई हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। बुधवार को अदालत ने स्पष्ट किया कि इस साल सभी नौ दिन बूचड़खाने बंद नहीं रहेंगे। जैन समाज की अहिंसा से जुड़ी इस मांग पर अदालत ने तात्कालिक राहत देने से इनकार किया। इससे पहले जैन संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट का एक पुराना फैसला दिखाते हुए कहा था कि अहमदाबाद की तरह ही मुंबई में भी नौ दिन की पूरी बंदी लागू की जानी चाहिए।

नौ दिन नहीं बंद रहेंगे बूचड़खाने

सुप्रीम कोर्ट ने लगभग 15 साल पहले गुजरात की एक याचिका में फैसला देते हुए विविधता में एकता बनाए रखने के लिए इस तरह की अस्थायी बंदी को उचित ठहराया था। इसी फैसले का हवाला देते हुए मुंबई के चार जैन संगठनों ने याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि महाराष्ट्र और खासकर मुंबई में जैन जनसंख्या अहमदाबाद से ज्यादा है, इसलिए पूरे पर्व के दौरान बूचड़खाने बंद रखे जाएं। इस पर 7 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश आलोक आरेडे और न्यायमूर्ति संदीप मारणे की खंडपीठ ने बीएमसी आयुक्त को नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया था।

इसके बाद मुंबई महापालिका आयुक्त ने पुनर्विचार कर केवल दो दिन कत्तलखाने बंद रखने का आदेश जारी किया। 24 और 27 अगस्त को कत्तलखाने बंद रहेंगे। आयुक्त ने हलफनामे में कहा कि मुंबई में सभी धर्मों के लोग रहते हैं और बड़ी संख्या मांसाहारी है। साथ ही देवनार कत्तलखाने पर केवल मुंबई ही नहीं, बल्कि पूरा महानगर क्षेत्र निर्भर है। ऐसे में पूरे नौ दिन की बंदी संभव नहीं है।

हालांकि याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने इस फैसले को अधूरा बताया। वरिष्ठ वकील डॉ. अभिनव चंद्रचूड़ ने दलील दी कि आयुक्त ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर ध्यान नहीं दिया और सिर्फ दो दिन की बंदी लागू की। वहीं प्रसाद ढाकेफालकर ने कहा कि मुंबई में शाकाहारी जनसंख्या भी बड़ी है, लेकिन बीएमसी ने मान लिया जैसे सभी लोग मांसाहारी हैं। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि मुगल बादशाह अकबर के समय जैन समाज के लिए छह महीने तक कत्तलखाने बंद रखे गए थे, लेकिन आज राज्य सरकार और महापालिका को मनाना और भी मुश्किल साबित हो रहा है।