मांस की दुकानों पर पाबंदी के खिलाफ विपक्ष और मांस विक्रेताओं का प्रदर्शन, CM फडणवीस बोले- 1988 से लागू है आदेश

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) के आदेश के खिलाफ शुक्रवार को विपक्षी दलों और मांस विक्रेताओं के संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया।
Devendra Fadnavis

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र के ठाणे जिले के कल्याण डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) के आदेश के खिलाफ शुक्रवार को विपक्षी दलों और मांस विक्रेताओं के संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। आदेश के तहत 14 अगस्त की मध्यरात्रि से 15 अगस्त की मध्यरात्रि तक सभी मांस की दुकानें 24 घंटे के लिए बंद रखने का निर्देश दिया गया था। प्रदर्शनकारियों ने इस पाबंदी को व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए नारे लगाए और हाथों में जीवित मुर्गे-मुर्गियां लेकर निगम मुख्यालय के बाहर विरोध जताया।

CM फडणवीस बोले- 1988 से लागू है आदेश

आदेश का विरोध केवल सड़क पर ही नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से भी किया गया। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम और शरद पवार की एनसीपी के नेताओं ने कैमरे के सामने मटन-चिकन पार्टी आयोजित कर निगम प्रशासन के फैसले को चुनौती दी। इन नेताओं का कहना था कि यह देश लोकतांत्रिक है, जहां हर व्यक्ति को अपने खानपान का अधिकार है, और सरकार या प्रशासन इस पर रोक नहीं लगा सकता। कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के कार्यकर्ताओं ने भी इस विरोध में भाग लिया और कल्याण स्थित केडीएमसी मुख्य कार्यालय के बाहर नारेबाजी की।

विरोध को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि इस तरह का आदेश नया नहीं है, बल्कि 1988 से लागू है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कोई नया निर्देश नहीं दिया, बल्कि यह पिछली सरकारों द्वारा जारी आदेश का ही पालन है। केडीएमसी प्रशासन ने पहले ही चेतावनी दी थी कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम, 1949 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

विरोध प्रदर्शन के दौरान कल्याण के शिवाजी चौक और शंकरराव चौक के बीच भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस विवाद के बीच यह भी सामने आया कि महाराष्ट्र के नागपुर, नासिक, मालेगांव और छत्रपति संभाजीनगर नगर निगमों ने भी इसी तरह के आदेश जारी किए हैं, जिससे राज्यभर में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।

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