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महाराष्ट्र विधानसभा में अबू आजमी की मांग, रमजान में मुस्लिम कर्मचारियों को शाम 4 बजे मिले छुट्टी, BJP बोली- ‘यह तुष्टिकरण है’

Written by:Ankita Chourdia
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समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने महाराष्ट्र विधानसभा में रमजान के पवित्र महीने के दौरान मुस्लिम सरकारी कर्मचारियों को शाम 4 बजे कार्यालय से छुट्टी देने की मांग की है। इस मांग पर बीजेपी ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे धर्म के आधार पर समाज को बांटने और तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया है।
महाराष्ट्र विधानसभा में अबू आजमी की मांग, रमजान में मुस्लिम कर्मचारियों को शाम 4 बजे मिले छुट्टी, BJP बोली- ‘यह तुष्टिकरण है’

महाराष्ट्र विधानसभा में उस वक्त सियासी माहौल गरमा गया जब समाजवादी पार्टी (SP) के विधायक अबू आजमी ने रमजान के महीने में मुस्लिम सरकारी कर्मचारियों के लिए विशेष रियायत की मांग उठाई। आजमी ने सदन में कहा कि रमजान के दौरान मुस्लिम कर्मचारियों को शाम 4 बजे घर जाने की इजाजत दी जानी चाहिए, ताकि वे समय पर इफ्तार और नमाज अदा कर सकें। इस मांग के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

अबू आजमी ने अपनी मांग को सही ठहराने के लिए कई तर्क दिए। उन्होंने कहा कि इस्लाम में समय पर नमाज पढ़ना बहुत महत्वपूर्ण है। कई बार दफ्तर में नमाज पढ़ने पर विवाद खड़ा हो जाता है। उन्होंने हाल ही में एक फार्मेसी कॉलेज की घटना का भी जिक्र किया, जहां उनके अनुसार तीन छात्रों को नमाज पढ़ने पर कथित तौर पर अपमानित किया गया था।

शिवाजी महाराज और आंध्र प्रदेश का दिया हवाला

अपनी बात को और मजबूती देने के लिए मानखुर्द शिवाजीनगर से विधायक आजमी ने छत्रपति शिवाजी महाराज के शासनकाल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज के राज में भी मुसलमान थे और उनके शासन में मस्जिदों और दरगाहों को मदद दी जाती थी, उनके खर्च के लिए जागीरें दी गईं। अगर सरकार दावा करती है कि वह शिवाजी महाराज के आदर्शों पर चलती है, तो उसे यह सहूलियत देनी चाहिए।”

इसके अलावा, उन्होंने आंध्र प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने भी रमजान के दौरान कर्मचारियों को ऐसी ही रियायत दी थी। आजमी ने यह भी मांग की कि रमजान के दौरान मुस्लिम बहुल इलाकों में बिजली और पानी की आपूर्ति बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से सुनिश्चित की जाए।

BJP का कड़ा विरोध, बताया बांटने वाली राजनीति

अबू आजमी की इस मांग का भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों ने पुरजोर विरोध किया। बीजेपी विधायक अमित साटम ने इस पर आपत्ति जताते हुए सवाल उठाया कि क्या हिंदू त्योहारों जैसे गणेश उत्सव, दिवाली या नवरात्रि के दौरान सरकारी कर्मचारियों को कोई विशेष छूट या छुट्टी दी जाती है?

“इस तरह के बयान समाज को धर्म के आधार पर बांटने का एक प्रयास है। किसी एक धर्म का तुष्टिकरण नहीं होना चाहिए।” — प्रसाद लाड़, बीजेपी विधायक

बीजेपी विधायक प्रसाद लाड़ ने भी इस मांग को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि अगर किसी को पूजा-पाठ या इबादत करनी है तो उसकी व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन इसके लिए सरकारी कामकाज के घंटों में कटौती करना या दो घंटे पहले छुट्टी देना सही नहीं है।

कांग्रेस ने बताया भावनात्मक विषय

इस पूरे सियासी घमासान पर कांग्रेस ने सधा हुआ रुख अपनाया। कांग्रेस के MLC भाई जगताप ने कहा कि यह एक भावनात्मक विषय है। उन्होंने कहा, “अगर इस पर विचार होता है तो यह अच्छा है।” इस मुद्दे को लेकर विधानसभा में बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस पर और राजनीति देखने को मिल सकती है।

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