महाराष्ट्र की सरकारी बस सेवा को लेकर सरकार की चिंता बढ़ गई है। दरअसल वित्त वर्ष 2025-26 में महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन महामंडल को 591 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। परिवहन मंत्री ने अधिकारियों को घाटे के कारणों की जांच करने और बसों व कर्मचारियों के बेहतर उपयोग की योजना बनाने को कहा है।
हाल ही में मुख्यालय में हुई समीक्षा बैठक में बताया गया कि वित्त वर्ष 2025-26 में परिवहन महामंडल का कुल परिचालन राजस्व लगभग 11,475 करोड़ रुपये रहा, जबकि खर्च 12,066 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं इस वजह से संस्था को भारी घाटा उठाना पड़ा है। अगर रोजाना के आंकड़े देखें तो स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण नजर आती है। हर दिन करीब 31 करोड़ 40 लाख रुपये की कमाई हो रही है, जबकि खर्च लगभग 33 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। इसका मतलब है कि रोज करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
MSRTC घाटा बढ़ने की वजहें
दरअसल राज्य के कुल 31 परिवहन विभागों की समीक्षा में सामने आया कि सिर्फ 8 विभाग ही मुनाफे में चल रहे हैं, जबकि 23 विभाग लगातार नुकसान में हैं। पिछले साल जालना, परभणी, बुलढाणा, भंडारा, गडचिरोली, अकोला, धुले और वर्धा जैसे विभागों ने बेहतर प्रदर्शन किया था। वहीं नाशिक, कोल्हापुर, नागपुर, रत्नागिरी, सातारा और ठाणे जैसे बड़े विभागों में घाटा बढ़ता जा रहा है।
दरअसल परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बैठक में साफ कहा कि आने वाले समय में बसों और मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग करना जरूरी है। उनका लक्ष्य है कि रोजाना होने वाले डेढ़ से दो करोड़ रुपये के घाटे को धीरे-धीरे कम किया जाए। इसके लिए विभागों को जिम्मेदारी तय करने और नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभागों की गहराई से जांच करवाने जा रही
वहीं सरकार अब घाटे में चल रहे विभागों की गहराई से जांच करवाने जा रही है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हर विभाग का अलग-अलग विश्लेषण किया जाए और पता लगाया जाए कि घाटा किन कारणों से बढ़ रहा है। जिन जगहों पर प्रशासनिक कमजोरी या गलत योजना सामने आएगी, वहां सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
बैठक में नागपुर विभाग का उदाहरण देते हुए मंत्री ने नाराजगी भी जताई। दरअसल उन्होंने कहा कि पिछले दो साल से वहां लगातार नुकसान हो रहा है और इसके पीछे प्रशासनिक कमजोरियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं। उनका कहना था कि जिन अधिकारियों के पास पर्याप्त अधिकार नहीं होते, वे विभाग को सही तरीके से संभाल नहीं पाते। इसलिए जरूरत पड़ने पर ऐसे अधिकारियों का स्थानांतरण कर अनुभवी और सक्षम नेतृत्व दिया जाएगा।






