Hindi News

बारामती उपचुनाव 2026: कांग्रेस का बड़ा फैसला, अजित पवार के सम्मान में नाम लिया वापस, सुनेत्रा पवार के लिए जीत का रास्ता साफ

Written by:Banshika Sharma
Published:
महाराष्ट्र की बारामती विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से कांग्रेस ने अपना हाथ खींच लिया है। यह फैसला पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के सम्मान में लिया गया है। कांग्रेस उम्मीदवार आकाश मोरे आज अपना नामांकन वापस लेंगे, जिससे सुनेत्रा पवार के लिए जीत का रास्ता साफ हो गया है।
बारामती उपचुनाव 2026: कांग्रेस का बड़ा फैसला, अजित पवार के सम्मान में नाम लिया वापस, सुनेत्रा पवार के लिए जीत का रास्ता साफ

महाराष्ट्र की बारामती विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से कांग्रेस ने अपना हाथ खींच लिया है। यह फैसला पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के दुखद निधन के सम्मान में लिया गया है। कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह इस उपचुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी, जिससे अब बारामती सीट पर चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। आज नामांकन वापस लेने का आखिरी दिन था, ऐसे में कांग्रेस का यह फैसला राजनीतिक गलियारों में बेहद अहम माना जा रहा है। इस निर्णय से ना केवल बारामती का चुनावी परिदृश्य बदला है, बल्कि इसने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया संदेश भी दिया है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्नाथाला ने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार को चुनाव मैदान से हटने का निर्देश दे दिया है। कांग्रेस के उम्मीदवार आकाश मोरे ने इस सीट से नामांकन दाखिल किया था, लेकिन पार्टी के निर्देश के बाद अब वह अपना पर्चा वापस लेंगे। इस कदम से बारामती में संभावित कड़े मुकाबले की तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है।

अजित पवार के सम्मान में कांग्रेस ने नाम लिया वा​पस

कांग्रेस ने इस फैसले के पीछे की वजह बताई है कि यह उपचुनाव अजित पवार के दुखद निधन के कारण हो रहा है। ऐसे संवेदनशील समय में पार्टी ने राजनीतिक मुकाबले से दूर रहना ही उचित समझा है। कांग्रेस का मानना है कि यह कदम राजनीतिक मर्यादा और संवेदनशीलता का सम्मान करता है। पार्टी ने इस निर्णय से यह संदेश देने की कोशिश की है कि कुछ मूल्य राजनीति से ऊपर होते हैं। कांग्रेस ने अपने बयान में कहा है कि ऐसे दुखद समय में राजनीतिक लाभ के लिए चुनाव लड़ना उचित नहीं है। यह फैसला दर्शाता है कि कुछ परिस्थितियों में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर फैसले लिए जाते हैं, खासकर जब बात किसी दिवंगत नेता के सम्मान की हो। राजनीतिक विश्लेषक इस कदम को एक परिपक्व और संयमित निर्णय के तौर पर देख रहे हैं।

कई राजनीतिक हस्तियों ने की थी कांग्रेस से अपील

यह फैसला लेने से पहले कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियों ने कांग्रेस से इस चुनाव में न उतरने की अपील की थी। इनमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार, सांसद सुप्रिया सुले और रोहित पवार जैसे बड़े नेता शामिल थे। इन सभी नेताओं ने कांग्रेस से मांग की थी कि बारामती उपचुनाव को निर्विरोध कराया जाए। उनका तर्क था कि यह चुनाव एक दुखद घटना के बाद हो रहा है, इसलिए इसे सम्मानजनक तरीके से संपन्न होना चाहिए।

दरअसल, इस उपचुनाव को लेकर पहले राजनीतिक माहौल थोड़ा तनावपूर्ण हो गया था। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार ने कांग्रेस के उम्मीदवार उतारने के फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने कांग्रेस के भविष्य को लेकर भी कुछ बयान दिए थे, जिससे राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी। हालांकि, कांग्रेस के इस फैसले के बाद अब इस विवाद के पूरी तरह खत्म होने की उम्मीद है।

बारामती सीट का अपना एक अलग राजनीतिक महत्व रहा है। यह सीट दशकों से पवार परिवार का गढ़ मानी जाती है। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस सीट से आठ बार विधायक के तौर पर प्रतिनिधित्व किया था। उनके निधन से यहां एक राजनीतिक शून्य पैदा हो गया था। अजित पवार ने अपने राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन बारामती हमेशा उनके साथ खड़ी रही। उनका दबदबा ऐसा था कि यहां किसी और राजनीतिक दल का टिकना मुश्किल माना जाता था। कांग्रेस का यह फैसला एक तरह से अजित पवार की इस विरासत को श्रद्धांजलि देने जैसा है।

कांग्रेस के हटने से सुनेत्रा पवार का रास्ता काफी आसान

कांग्रेस के चुनाव मैदान से हटने के बाद अब सुनेत्रा पवार का रास्ता काफी आसान माना जा रहा है। अगर कोई अन्य बड़ा उम्मीदवार इस सीट पर अपना नामांकन दाखिल नहीं करता या वापस नहीं लेता है, तो बारामती का यह उपचुनाव लगभग निर्विरोध हो सकता है। यह अजित पवार के परिवार और उनके राजनीतिक विरासत के लिए एक बड़ी जीत होगी। अगर बारामती में उपचुनाव निर्विरोध होता है, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक मिसाल कायम करेगा। सुनेत्रा पवार के लिए यह एक तरह से अजित पवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का पहला कदम होगा, जिस पर कोई सीधी चुनौती नहीं होगी।

संजय राउत ने कांग्रेस के इस फैसले पर उठाए सवाल

हालांकि, कांग्रेस के इस फैसले पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत ने सवाल उठाए हैं। राउत ने कहा कि विपक्ष के पास अजित पवार की विमान हादसे में मौत की एफआईआर दर्ज कराने का एक बड़ा मौका था, जिसे उन्होंने गंवा दिया। राउत के मुताबिक, कांग्रेस उम्मीदवार आकाश मोरे के नामांकन वापस लेने के बदले यह मांग पूरी कराई जा सकती थी। उनका मानना है कि ऐसा करने से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भी बेनकाब किया जा सकता था।

राउत ने आगे कहा कि अजित पवार के हादसे की जांच के लिए एफआईआर दर्ज होना बेहद जरूरी है, लेकिन सरकार इस मामले में गंभीर नजर नहीं आ रही है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस मुद्दे को सबसे पहले सुनेत्रा पवार और उनके परिवार को उठाना चाहिए था। राउत के अनुसार, यह घटना सिर्फ अजित पवार के परिवार से नहीं जुड़ी है, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति का एक बड़ा मुद्दा है जिस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। इसके अलावा, राउत ने चुनाव आयोग के रवैये की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के विवाद पर आयोग का व्यवहार निष्पक्ष नहीं दिखता, जो लोकतंत्र पर हमला है।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
Follow Us :GoogleNews