महाराष्ट्र के बारामती उपचुनाव में नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख आज 9 अप्रैल है। दरअसल इससे ठीक पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की उम्मीदवार सुनेत्रा पवार ने कांग्रेस से अपने उम्मीदवार आकाश मोरे का नाम वापस लेने का अनुरोध किया है। उन्होंने महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से बात कर यह अपील की है।
दरअसल बारामती सीट को महाराष्ट्र की राजनीति में बेहद अहम माना जाता है। यह उप मुख्यमंत्री अजित पवार की पारंपरिक सीट रही है, इसलिए यहां होने वाला उपचुनाव राज्य की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुछ समय पहले तक यह माना जा रहा था कि सुनेत्रा पवार निर्विरोध विधायक चुनी जा सकती हैं, क्योंकि किसी अन्य दल ने उम्मीदवार नहीं उतारा था।
कांग्रेस ने आकाश मोरे को उम्मीदवार बनाया
हालांकि नामांकन की प्रक्रिया के अंतिम दिनों में कांग्रेस ने आकाश मोरे को उम्मीदवार बनाकर चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया। कांग्रेस के इस फैसले के बाद से सत्तारूढ़ महायुति के नेता लगातार कांग्रेस से उम्मीदवार वापस लेने की अपील कर रहे हैं। इसी बीच सुनेत्रा पवार ने खुद पहल करते हुए महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से बातचीत की और उनसे आकाश मोरे का नामांकन वापस लेने का अनुरोध किया। उनका कहना है कि बारामती से उन्हें निर्विरोध विधायक चुने जाने का मौका दिया जाए।
देवेंद्र फडणवीस ने भी दिया समर्थन
वहीं इस घटनाक्रम से पहले सुनेत्रा पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी मुलाकात की थी। इस दौरान उपचुनाव की रणनीति और प्रचार को लेकर चर्चा हुई। जानकारी के अनुसार देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया और कहा कि भाजपा इस उपचुनाव में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।बारामती उपचुनाव के लिए मतदान 23 अप्रैल को होना है। हालांकि आज 9 अप्रैल को नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख होने के कारण यह दिन काफी अहम माना जा रहा है। अब सभी की नजर कांग्रेस के फैसले पर है।
दरअसल अगर कांग्रेस अपने उम्मीदवार आकाश मोरे का नामांकन वापस ले लेती है तो सुनेत्रा पवार निर्विरोध विधायक चुनी जा सकती हैं। लेकिन अगर कांग्रेस उम्मीदवार मैदान में बना रहता है तो बारामती में सीधा चुनावी मुकाबला देखने को मिलेगा। इस पूरे घटनाक्रम को महाराष्ट्र की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह साफ हो जाएगा कि कांग्रेस सुनेत्रा पवार के अनुरोध को मानती है या फिर चुनावी मुकाबले को जारी रखती है।






