महाराष्ट्र सरकार ने एलपीजी (LPG) की आपूर्ति में वैश्विक राजनीतिक गतिविधियों के कारण आ रही लगातार बाधाओं को देखते हुए एक बड़ा निर्णय लिया है। दरअसल राज्य में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क के विस्तार को अब युद्धस्तर पर पूरा करने का आदेश दिया गया है। इस महत्त्वपूर्ण कदम के तहत, गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए लंबित सभी अनुमतियों को तत्काल ‘मंजूर’ (Deemed Approved) मान लिया जाएगा, जिससे परियोजनाओं को बिना किसी देरी के शुरू किया जा सकेगा। इसके साथ ही, नए आवेदनों को सिर्फ 24 घंटे के भीतर मंजूरी दी जाएगी। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार का यह आदेश 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा, जिसका सीधा मकसद राज्य के नागरिकों और वाणिज्यिक इकाइयों को निर्बाध और स्थायी गैस आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

दरअसल इस फैसले का मुख्य उद्देश्य मौजूदा एलपीजी संकट से निपटना और राज्य को ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत पीएनजी (PNG) की ओर तेजी से बढ़ाना है। एलपीजी की बढ़ती कीमतें और आपूर्ति में अनिश्चितता ने आम उपभोक्ताओं और विभिन्न उद्योगों के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

कई अहम रियायतें दी गई

वहीं इसे देखते हुए, सरकार ने गैस पाइपलाइन परियोजनाओं को त्वरित गति से पूरा करने के लिए कई अहम रियायतें दी हैं। इनमें सबसे प्रमुख सड़क मरम्मत शुल्क की माफी है। अब गैस कंपनियां पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों की मरम्मत के लिए लगने वाले शुल्क से मुक्त होंगी, जिससे उनकी परिचालन लागत में कमी आएगी और वे इन परियोजनाओं में और अधिक निवेश कर सकेंगी।

कंपनियों को अब 24 घंटे काम करने की अनुमति

काम में तेजी लाने और विस्तार परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए, गैस पाइपलाइन बिछाने वाली कंपनियों को अब 24 घंटे काम करने की अनुमति दी गई है। यह कदम विशेष रूप से शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाने के काम को गति देगा, जहां दिन के समय ट्रैफिक और अन्य बाधाओं के कारण काम धीमा हो जाता है। इस छूट से कंपनियों को अपनी मशीनरी और मानव संसाधन का अधिकतम उपयोग करने का अवसर मिलेगा, जिससे नेटवर्क का विस्तार कम समय में संभव हो सकेगा।

पुलिस से एनओसी (NOC) लेने की आवश्यकता नहीं

अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए, सरकार ने एक और बड़ा बदलाव किया है। अब गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए अग्निशमन विभाग (Fire Department) या ट्रैफिक पुलिस से एनओसी (NOC) यानी अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता नहीं होगी। यह कदम उन जटिल और समय लेने वाली प्रक्रियाओं को खत्म करता है, जो अक्सर परियोजनाओं को सालों तक लटकाए रखती हैं। सरकार ने इस संबंध में सभी नियमों और शर्तों को शिथिल कर दिया है, ताकि कंपनियों को कागजी कार्रवाई में उलझे बिना सीधे जमीन पर काम शुरू करने में मदद मिल सके। यह निर्णय नौकरशाही बाधाओं को दूर कर परियोजना कार्यान्वयन में तेजी लाएगा।

राज्य सरकार ने पाइप से मिलने वाली प्राकृतिक गैस (PNG) को अब पानी और बिजली की तरह ही ‘अत्यावश्यक सेवा’ घोषित कर दिया है। इस घोषणा का सीधा अर्थ है कि पीएनजी की आपूर्ति को अब उतनी ही गंभीरता और प्राथमिकता से लिया जाएगा, जितनी पानी और बिजली की आपूर्ति को। यह कदम पीएनजी की विश्वसनीयता और उपलब्धता को बढ़ाएगा, खासकर ऐसे समय में जब एलपीजी की आपूर्ति में अनिश्चितता बनी हुई है। आवश्यक सेवा का दर्जा मिलने से सरकार की यह जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि वह नागरिकों को निर्बाध पीएनजी आपूर्ति सुनिश्चित करे, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और उपभोक्ताओं को एक स्थिर विकल्प मिलेगा।

इस फैसले के तहत, घरेलू उपयोग के लिए पीएनजी की आपूर्ति को सबसे पहली प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि आम घरों को गैस संकट से बचाया जा सके। इसके अलावा, होटल, स्कूल, अस्पताल, सामुदायिक रसोई और हॉस्टलों जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को भी पीएनजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। ये ऐसे प्रतिष्ठान हैं जहां गैस की निरंतर उपलब्धता उनके संचालन के लिए बेहद जरूरी होती है। इन वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को उनकी कुल जरूरत का 50 प्रतिशत तक पीएनजी वाणिज्यिक दरों पर उपलब्ध कराया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि इन संस्थानों में भी गैस की कमी न हो, जिससे उनकी दैनिक गतिविधियों और सेवाओं पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।