महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल, फडणवीस-राज ठाकरे मुलाकात और शिंदे के विभाग पर नाराजगी से बढ़े कयास

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। हाल ही में राज ठाकरे की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हुई मुलाकात ने सियासी चर्चाओं को हवा दी थी। अब फडणवीस ने सार्वजनिक रूप से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के विभाग की कड़ी आलोचना कर दी है।
Devendra Fadnavis Eknath Shinde Ajit Pawar

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। राज्य की 48 लोकसभा और 288 विधानसभा सीटों के चलते यहां का राजनीतिक समीकरण राष्ट्रीय राजनीति में भी अहम माना जाता है। हाल ही में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हुई मुलाकात ने सियासी चर्चाओं को हवा दी थी। अब फडणवीस ने सार्वजनिक रूप से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के विभाग की कड़ी आलोचना कर दी है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या महायुति सरकार के भीतर मतभेद बढ़ रहे हैं और क्या इससे नए राजनीतिक समीकरण बनने की शुरुआत हो सकती है। साथ ही, अटकलें यह भी लगाई जा रही हैं कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना भविष्य में एनडीए में वापसी कर सकती है।

महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल

दरअसल, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में केंद्र प्रायोजित योजनाओं की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने शहरी विकास विभाग-2 (UDD-2) के कामकाज को “खराब प्रदर्शन” करार दिया। यह विभाग उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के जिम्मे है। फडणवीस ने कहा कि AMRUT 2.0 जैसी महत्वपूर्ण योजना, जिसे 2021 में शुरू किया गया था और मार्च 2026 तक पूरी होनी है, में बेहद देरी हो रही है। इस योजना के लिए महाराष्ट्र को केंद्र से 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिल चुकी है। बैठक में फडणवीस ने अधिकारियों को सभी लंबित कार्य समय पर पूरा करने और प्रशासनिक मंज़ूरी तुरंत देने का निर्देश दिया।

फडणवीस ने कहा कि AMRUT मिशन जल आपूर्ति, स्वच्छता, हरित उद्यान और झीलों के पुनर्जीवन जैसे कार्यों से जुड़ा है और यह नागरिकों के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि 31 मार्च 2026 तक सभी परियोजनाएं पूरी हो जानी चाहिए। सीएम ने स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन और 15वें वित्त आयोग की अनुदान राशि के उपयोग की भी समीक्षा की। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना आवश्यक मंजूरी लिए कोई प्रोजेक्ट शुरू न किया जाए और विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

इस बीच, शिंदे के विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मंत्री पहले ही अफसरों को चेतावनी दे चुके हैं और ज़िम्मेदारी तय करने के आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि AMRUT 2.0 और नगरोत्थान महाभियान जैसी योजनाओं में देरी होने पर ठेकेदारों, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, विवाद के बीच शिंदे ने छत्रपति संभाजीनगर में फडणवीस द्वारा आयोजित एक जलापूर्ति योजना के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। उनकी गैरमौजूदगी पर शिंदे गुट के मंत्री प्रताप सरनाईक ने टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन यह जरूर कहा कि विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर शिंदे पहले ही सख्त निर्देश जारी कर चुके हैं।

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