
महाराष्ट्र में इस समय लगातार हो रही भारी बारिश ने कई जिलों में तबाही मचा दी है। मराठवाड़ा और सोलापुर समेत कई हिस्सों में बादल फटने जैसी स्थिति बनी, जिससे खेत-खलिहान पानी में डूब गए और स्कूल-कॉलेज बंद करने पड़े। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा है कि ऐसे गंभीर हालात में सरकार और प्रशासन कहां है। शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र सामना ने संपादकीय “गीले अकाल का हाहाकार… कहां है सरकार?” में सीधे-सीधे आरोप लगाया कि संकट की इस घड़ी में राहत और बचाव के इंतजाम नदारद हैं।
मराठवाड़ा और उसके पड़ोसी जिलों में लगातार बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। बीड, धाराशिव, लातूर, नांदेड़ और सोलापुर के खेत झील जैसे बन गए हैं। धाराशिव के 24 मंडलों और बीड के 29 मंडलों में पिछले दिनों रातभर मूसलाधार बारिश हुई, जिससे नदी-नाले उफान पर आ गए। कई गांवों में बाढ़ का पानी घरों तक घुस गया है। धुले–सोलापुर राष्ट्रीय राजमार्ग का करीब दो किलोमीटर हिस्सा पूरी तरह पानी में डूब गया और यह नदी जैसा बहने लगा। इसके चलते महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश को जोड़ने वाला यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
विपक्ष ने सरकार पर उठाए सवाल
भारी बारिश से लाखों हेक्टेयर में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। विपक्ष का कहना है कि सोयाबीन, कपास, उड़द, मूंग, तुअर, मक्का, गन्ना और केले जैसी मुख्य फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। केवल सोलापुर जिले में ही 1.35 लाख हेक्टेयर भूमि पर 1.55 लाख किसानों की फसलें तबाह हो गई हैं। मराठवाड़ा और सोलापुर में कुल 27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसलें प्रभावित बताई जा रही हैं। जायकवाडी समेत 21 बड़े बांध उफनने लगे हैं और नाथसागर के गेट पांचवीं बार खोलने पड़े। सामना संपादकीय का कहना है कि अतिवृष्टि ने मिट्टी की मृदा संरचना तक को नुकसान पहुंचाया है, जिसकी भरपाई लगभग असंभव है।
इस संकट के बीच विपक्ष और खासतौर पर शिवसेना (यूबीटी) ने सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि राज्य को “गीला अकाल” घोषित किया जाए और प्रभावित किसानों को त्वरित राहत पैकेज दिया जाए। साथ ही, फसल नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा और कर्जमाफी की घोषणा तत्काल की जाए। संपादकीय में यह भी कहा गया है कि लाखों परिवार आजीविका के संकट में फंस गए हैं और अगर सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो ग्रामीण जनता का आक्रोश और बढ़ेगा।
शिवसेना (यूबीटी) का आरोप है कि यह दशकों का सबसे बड़ा संकट है, लेकिन प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब किसान और आम लोग बारिश और बाढ़ से जूझ रहे हैं तो सरकार की भूमिका क्यों नहीं दिख रही। विपक्ष ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर राहत और पुनर्वास का काम तुरंत नहीं हुआ तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर सकता है।
