
महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना की लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी को अनिवार्य कर दिया है। सरकार ने इसके लिए गुरुवार (18 सितंबर) को एक आधिकारिक सरकारी आदेश (जीआर) जारी किया और लाभार्थियों को दो महीने की समय सीमा दी गई है। इस कदम का मकसद योजना में पारदर्शिता बनाए रखना और केवल पात्र महिलाओं तक ही सहायता पहुंचाना है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने बताया कि ई-केवाईसी के लिए एक विशेष वेब पोर्टल- https://ladakibahin.maharashtra.gov.in/ — शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि सभी लाभार्थियों से अनुरोध है कि वे अगले दो महीनों में ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर लें। तटकरे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि यह प्रक्रिया सरल और सुविधाजनक है तथा इससे योजना में पारदर्शिता आएगी और पात्र महिलाओं को नियमित लाभ मिलता रहेगा।
लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य
उन्होंने आगे कहा कि यह प्रक्रिया न सिर्फ इस योजना बल्कि भविष्य में अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ उठाने के लिए भी उपयोगी होगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2024 में शुरू की गई लाडकी बहिन योजना के तहत करीब 2.25 करोड़ महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत 21 से 65 वर्ष की आयु वर्ग की उन महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक सहायता दी जाती है, जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं है।
हालांकि, इस योजना में शुरुआत से ही गड़बड़ियां सामने आई हैं। ऑडिट में पता चला कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए कई पुरुषों ने खुद को महिला बताकर इस योजना का लाभ उठाया। सूत्रों के मुताबिक, लगभग 14,000 पुरुष इस योजना के लाभार्थियों की सूची में शामिल हो गए थे, जिससे सरकारी खजाने को लगभग ₹21.44 करोड़ का नुकसान हुआ।
इतना ही नहीं, कई महिलाएं जो पहले से सरकारी नौकरी में हैं या आर्थिक रूप से सक्षम हैं, उन्होंने भी इस योजना का लाभ लिया। सरकार का मानना है कि ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने से ऐसी धांधलियों पर रोक लगेगी और सहायता सही लाभार्थियों तक पहुंचेगी। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना पर विपक्ष पहले ही सवाल उठा चुका है। ऐसे में सरकार का यह कदम योजना की विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।
