महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल देखने को मिला है, जहाँ शिवसेना (यूबीटी) के भीतर चल रहा सियासी संकट गुरुवार को और गहरा गया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के छह सांसदों ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है, जिसके तुरंत बाद महाराष्ट्र सरकार ने इन बागी सांसदों को वाई-प्लस श्रेणी के समकक्ष सुरक्षा प्रदान कर दी है, इस कदम पर संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सरकार पर निशाना साधा है। यह घटनाक्रम पिछले चार वर्षों में महाराष्ट्र का तीसरा बड़ा राजनीतिक विभाजन माना जा रहा है, इससे पहले 2022 में शिवसेना और 2023 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में बड़े पैमाने पर टूट हो चुकी है, जो राज्य की अस्थिर राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है।
विद्रोह की शुरुआत तब हुई जब तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय कर भाजपा नीत एनडीए को समर्थन देने का प्रस्ताव रखा था। इस घटना के महज कुछ दिनों बाद शिवसेना (यूबीटी) में यह नया विद्रोह सामने आया है, जिससे राज्य में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं और राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है। बागियों ने कांग्रेस के साथ संभावित विलय की आशंका को अपने विद्रोह का मुख्य कारण बताया है, उनका कहना है कि वे अपनी पार्टी के कांग्रेस के साथ बढ़ते झुकाव से असहज महसूस कर रहे थे।
उद्धव गुट की अहम बैठक से छह सांसदों ने बनाई दूरी
गुरुवार को नई दिल्ली में शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी, जिसका उद्देश्य उद्धव ठाकरे के प्रति समर्थन का आकलन करना और संभावित दल-बदल को रोकना था। हालांकि, पार्टी हाईकमान द्वारा जारी व्हिप की अवहेलना करते हुए, नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने इस बैठक में हिस्सा नहीं लिया, जिससे पार्टी के भीतर की दरार स्पष्ट रूप से उजागर हो गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में केवल तीन सांसद – अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजभाऊ वाजे – ही उपस्थित रहे, जो उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। विद्रोहियों ने एक दिन पहले ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय से पहले खुद को एक अलग समूह के रूप में मान्यता दिलाने के लिए एक पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए थे, जिससे उनकी मंशा साफ हो गई थी।
कांग्रेस में विलय की आशंका से बढ़ी सांसदों की नाराजगी
शिंदे गुट से जुड़े नेताओं ने इस विद्रोह की जड़ में यूबीटी शिवसेना के कई सांसदों की यह गहरी धारणा बताई है कि पार्टी लगातार कांग्रेस की ओर अग्रसर हो रही है। बागी सांसद नरेश म्हस्के ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलकर दावा किया कि कई सांसदों ने अरविंद सावंत के माध्यम से उद्धव ठाकरे से मुलाकात की मांग की थी, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिससे उनकी आशंकाएं और बलवती हो गईं। म्हस्के ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सांसदों को यह डर था कि पार्टी का अंततः कांग्रेस में विलय हो जाएगा, और इसी आशंका के चलते उन्होंने एक अलग राजनीतिक मार्ग चुनने का निर्णय लिया। उन्होंने संजय राउत पर ‘कांग्रेस का एजेंट’ होने का गंभीर आरोप भी लगाया, साथ ही राउत के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के कांग्रेस में विलय की संभावना जताई थी, जिससे उनके आरोपों को और मजबूती मिली।
इस बढ़ते सियासी तनाव के बीच, महाराष्ट्र खुफिया विभाग ने छह बागी सांसदों- संजय दीना पाटिल, नागेश पाटिल अष्टिकर, ओम राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय देशमुख और संजय जाधव को वाई-प्लस श्रेणी के बराबर सुरक्षा मुहैया करा दी है। राज्य खुफिया आयुक्त शिरीष जैन के 17 जून के आदेश के अनुसार, यह कदम इन सांसदों को संभावित खतरों के मद्देनजर उठाया गया है, जो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक माना गया। इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने तंज कसते हुए कहा कि अगर इन बागियों में हिम्मत है तो वे बिना सुरक्षा के घूमकर दिखाएं, जिससे राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है। महाराष्ट्र में यह ताजा संकट केवल सत्ताधारी और विपक्षी खेमों के बीच ही नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक परिदृश्य में नई बहस और अटकलें पैदा करने वाला है, जो राज्य की अस्थिर राजनीति को एक बार फिर उजागर कर रहा है।






