महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। जहां आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटील आरक्षण की मांग पर मुंबई के आजाद मैदान में डटे हुए हैं, वहीं सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इसको लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हाल ही में बिना नाम लिए शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे की सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि कुछ राजनीतिक दल मनोज जरांगे के कंधे पर बंदूक रखकर अपना स्वार्थ साधने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई लाभ नहीं मिलने वाला।
उद्धव-फडणवीस में जुबानी जंग तेज
फडणवीस के बयान पर उद्धव ठाकरे ने पलटवार करते हुए कहा कि “मराठाओं के कंधे पर बंदूक रखकर कौन गोली चला रहा है, यह खुद मुख्यमंत्री को ही तलाशना चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर जो वादे और शपथ ली गई थी, उन्हें आज तक क्यों पूरा नहीं किया गया। ठाकरे ने सरकार को चेतावनी दी कि मराठा जनता से छल और कपट करने की बजाय ईमानदारी से बातचीत करनी चाहिए। उनके इस तीखे बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहराता चला गया है।
उद्धव के जवाब पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने फिर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल में मराठा समाज के लिए किए गए कामों की सूची दिखा दें। फडणवीस के मुताबिक, मराठा समाज के उत्थान के लिए सबसे अधिक कदम 2014 से अब तक की बीजेपी सरकारों ने उठाए हैं और विपक्ष सिर्फ राजनीति कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार संवैधानिक ढांचे के भीतर रहकर इस समस्या का हल खोज रही है और मराठा समाज के साथ अन्याय नहीं होगा।
इसी बीच, आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील ने ऐलान कर दिया है कि जब तक आरक्षण नहीं मिलता, वे मुंबई के आजाद मैदान से नहीं हटेंगे। शुक्रवार (29 अगस्त) से शुरू हुए इस आंदोलन में राज्यभर से हजारों लोग शामिल हुए हैं। पुलिस ने उन्हें केवल शनिवार तक प्रदर्शन की अनुमति दी थी, लेकिन जरांगे ने इसे आगे बढ़ाने की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि अगर आरक्षण दिलाने के लिए गोलियां भी खानी पड़ीं, तो वे पीछे नहीं हटेंगे। इस जिद और सियासी बयानबाजी से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गरमाने वाला है।





