महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर चल रहे आंदोलन का पांचवें दिन यानी 2 सितंबर को समापन हो गया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मनोज जरांगे ने अनशन खत्म करने की घोषणा की। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि राज्य सरकार ने मराठा समाज की प्रमुख मांगों को पूरा कर न्याय का काम किया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मराठा समाज को आरक्षण का लाभ देने के साथ अन्य समुदायों का आरक्षण भी अक्षुण्ण रखा गया है। शिंदे ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, डिप्टी सीएम अजित पवार और उन्होंने मिलकर विपक्ष की साजिश को नाकाम किया है।
एकनाथ शिंदे ने दिया बड़ा बयान
एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि विपक्ष ने मराठा आरक्षण मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की थी, लेकिन महायुति सरकार शुरुआत से ही इस विषय पर सकारात्मक रही है। शिवसेना (यूबीटी) ने उन पर आरोप लगाया था कि सरकार अस्थिर करने के लिए आंदोलन को खड़ा किया गया, लेकिन शिंदे ने दावा किया कि यह केवल राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिश थी। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार ने भावनात्मक मुद्दे पर व्यापक चर्चा कर ठोस और टिकाऊ निर्णय लिए हैं।
शिंदे ने बताया कि सरकार ने ‘हैदराबाद गजट’ लागू करने का फैसला लिया है, जिससे मराठा समुदाय के लोगों को कुणबी जाति का प्रमाणपत्र प्राप्त करने में आसानी होगी। कुणबी एक कृषक वर्ग है जिसे महाराष्ट्र में ओबीसी श्रेणी में शामिल किया गया है। इसका लाभ मराठा समाज को शिक्षा और रोजगार में ओबीसी आरक्षण के रूप में मिलेगा। उन्होंने बताया कि रिटायर्ड जस्टिस संदीप शिंदे की अध्यक्षता वाली समिति अब तक 58 लाख कुणबी प्रविष्टियों का पता लगा चुकी है, जिनमें से 10.35 लाख प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं।
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलनकारी मनोज जरांगे के साथ सरकार की कोई गुप्त या बैक चैनल वार्ता नहीं हुई। सभी निर्णय पूरी पारदर्शिता और कानूनी दायरे में रहकर लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने न सिर्फ मराठा समाज की भावनाओं का सम्मान किया है बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि अन्य समुदायों के अधिकारों से कोई समझौता न हो। शिंदे ने दोहराया कि सरकार के सभी फैसले कानूनी रूप से मजबूत हैं और अदालत में टिकेंगे।





