
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मुंबई के आजाद मैदान में आमरण अनशन पर बैठे मनोज जरांगे ने मंगलवार शाम अपना अनशन खत्म कर दिया। मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तोड़वाया। जरांगे 29 अगस्त से भूख हड़ताल पर थे। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बैठक के बाद उनकी सात में से पांच मांगें मान ली गईं और दो मांगों पर प्रक्रिया जारी है। जरांगे ने कहा कि सरकार ने उन्हें लिखित आश्वासन दिया है और वह इस आंदोलन को अपनी जीत मानते हैं।
मनोज जरांगे ने खत्म किया आमरण अनशन
जरांगे की कुल आठ मांगों में से छह पर सरकार ने सहमति जताई है। इनमें हैदराबाद, सतारा और औंध गजट्स लागू करना, आंदोलनकारियों पर दर्ज आपराधिक मामले वापस लेना, आंदोलन के दौरान मारे गए परिवारों को 15 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी, 58 लाख से अधिक कुणबी नोंदी ग्राम पंचायत स्तर पर चिपकाना और वंशवली (शिंदे) समिति की अवधि बढ़ाना शामिल है। वहीं, मराठा-कुणबी एक का सरकारी आदेश (जीआर) और सगे-सोयरे प्रमाणपत्र की जांच प्रक्रिया फिलहाल अधूरी है, जिस पर आगे निर्णय होगा।
मंगलवार को अनशन के पांचवें दिन पुलिस आज़ाद मैदान खाली कराने पहुंची तो समर्थकों से उनकी बहस हो गई। हाईकोर्ट ने पहले मंगलवार दोपहर 3 बजे तक मैदान खाली करने का आदेश दिया था, लेकिन सरकार ने जरांगे और उनके समर्थकों को बुधवार सुबह तक का समय दिया है। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि आदेश का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी बीच, महाराष्ट्र सरकार के चार मंत्री—राधाकृष्ण विखे पाटिल, शिवेंद्र राजे भोंसले, जय कुमार गोरे और माणिकराव कोकाटे—जरांगे से मिले और समिति की रिपोर्ट और फैसलों की जानकारी दी।
जरांगे ने समर्थकों से कहा कि आंदोलन ने बड़ी जीत हासिल की है और सरकार ने उनकी ज्यादातर मांगें मान ली हैं। हालांकि, उन्होंने सरकार को दो महीने का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि मराठा समुदाय को कुणबी का हिस्सा घोषित करने वाला जीआर जल्द जारी किया जाए। जरांगे ने यह भी कहा कि अगर सरकार ने वादा निभाया तो वह मुंबई से आंदोलन हटाकर वापस लौट जाएंगे। वहीं, सरकार ने आंदोलनकारियों पर दर्ज केस वापस लेने और मृतक परिवारों को आर्थिक मदद एक सप्ताह में देने का आश्वासन दिया है।
