मराठा आरक्षण पर संजय निरुपम का बयान, बोले- किसी और समाज का हक छीनकर मांगना लॉजिकल नहीं

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन लगातार सुर्खियों में है और इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने शनिवार (30 अगस्त) को कहा कि मराठा नेता मनोज जरांगे पाटील लंबे समय से अपने समाज के आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
मराठा आरक्षण पर संजय निरुपम का बयान, बोले- किसी और समाज का हक छीनकर मांगना लॉजिकल नहीं

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन लगातार सुर्खियों में है और इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने शनिवार (30 अगस्त) को कहा कि मराठा नेता मनोज जरांगे पाटील लंबे समय से अपने समाज के आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे हैं और हम उनके आंदोलन का सम्मान करते हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि मराठा समुदाय के युवाओं में बेरोजगारी की समस्या गंभीर है और सरकार भी इसे दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन साथ ही उन्होंने साफ कहा कि किसी दूसरे समाज का हिस्सा काटकर आरक्षण की मांग करना तार्किक नहीं लगता।

मराठा आरक्षण पर संजय निरुपम का बयान

निरुपम ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मनोज जरांगे पाटील लगातार मराठा समाज के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। हम सब चाहते हैं कि महाराष्ट्र के नौजवानों को नौकरियों में अधिक अवसर मिलें। समाज में बेरोजगारी दूर करने के लिए सरकार ने करीब 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया है। लेकिन जरांगे की यह जिद कि मराठा समाज को ओबीसी कोटे में शामिल किया जाए, इसका मतलब है कि ओबीसी के हिस्से का आरक्षण मराठों को देना। यह ओबीसी समाज को स्वीकार नहीं होगा।”

उन्होंने आगे कहा कि सरकार के सामने यह सबसे बड़ी चुनौती है कि मराठा समाज को आरक्षण कैसे दिया जाए। निरुपम के मुताबिक, “मराठा समाज को जो आरक्षण मिला है वह जारी रहना चाहिए। अगर कोई अतिरिक्त रास्ता खोजा जा सकता है तो उस पर चर्चा होनी चाहिए। लेकिन किसी अन्य वर्ग का हिस्सा लेकर उसमें से आरक्षण देना न्यायसंगत नहीं होगा। ऐसे मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों को मिलकर विचार करना चाहिए और एक राय बनानी चाहिए ताकि स्थायी समाधान निकल सके।”

संजय निरुपम ने इस दौरान महाविकास अघाड़ी (MVA) को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन में शामिल पार्टियां इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे बैठी हैं और उन्होंने एक बार भी यह नहीं बताया कि जरांगे पाटील की मांगों का समाधान कैसे किया जा सकता है। निरुपम के अनुसार, “वे सिर्फ सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। जरांगे पाटील का आंदोलन इस वजह से खराब हो सकता है। जरांगे को भी चाहिए कि वे केवल सरकार से ही नहीं, बल्कि सभी राजनीतिक पार्टियों से अपील करें और व्यापक सहमति की दिशा में कदम बढ़ाएं।”

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