
मुंबई के नरिमन प्वाइंट स्थित 4.2 एकड़ जमीन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। यह वही जगह है जहां पहले कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के दफ्तर हुआ करते थे। मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMRCL) ने इस जमीन को रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को 3,472 करोड़ रुपये में सौंपने का करार किया है। अब कांग्रेस ने इस डील का विरोध करते हुए दावा किया है कि वह इस जमीन की स्टेकहोल्डर है और अगर समझौता रद्द नहीं किया गया तो पार्टी अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।
कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने आरोप लगाया कि सरकार ने लिखित वादा किया था कि कांग्रेस को उसी जगह पर पुनर्वास मिलेगा। लेकिन अब पृष्ठभूमि बताए बिना जमीन आरबीआई को बेच दी गई। उन्होंने कहा कि इस जमीन का बाजार मूल्य करीब 5,200 करोड़ रुपये है, जबकि इसे मात्र 3,400 करोड़ रुपये में सौंपकर राज्य को लगभग 1,800 करोड़ का नुकसान कर दिया गया। सावंत ने इस डील को मनमानी और अहंकारपूर्ण बताते हुए तुरंत रद्द करने की मांग की।
नरिमन प्वाइंट की जमीन सौदे पर बवाल
गौरतलब है कि यह जमीन पहले बैरकों के रूप में पार्टियों को दफ्तर चलाने के लिए दी गई थी। बाद में मेट्रो लाइन-3 के तहत विधान भवन मेट्रो स्टेशन बनाने के लिए यह जगह खाली कराई गई। तब आश्वासन दिया गया था कि राजनीतिक दलों को पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। अब कांग्रेस का आरोप है कि उस वादे से मुकरते हुए जमीन सीधे आरबीआई को सौंप दी गई है।
वहीं, MMRCL की प्रबंध निदेशक अश्विनी भिड़े ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह जमीन हमेशा से सरकारी थी और राजनीतिक दलों को केवल अस्थायी तौर पर दफ्तर के लिए उपलब्ध कराई गई थी। भिड़े ने स्पष्ट किया कि आरबीआई से मिली रकम राज्य सरकार को दी जाएगी, जिसका इस्तेमाल नीतियों और जरूरतों के अनुसार दफ्तरों के पुनर्वास में होगा। उनके मुताबिक यह पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया है और मुंबई की मेट्रो परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने का उद्देश्य रखती है।
इधर, पर्यावरण कार्यकर्ता जोरू भठेना ने भी इस जमीन को लेकर अलग मांग रखी है। उन्होंने कहा कि आरबीआई की नई बिल्डिंग बनाने के बजाय इसे फिर से हरित क्षेत्र और खेल मैदान के रूप में बहाल किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि पहले यहां पेड़ों से घिरा बड़ा मैदान था और मेट्रो प्राधिकरण ने वादा किया था कि काम पूरा होने पर हरित क्षेत्र दोबारा तैयार किया जाएगा। भठेना ने अपील की कि शहर में हरित क्षेत्र बचाने के लिए सरकार को इस वादे का पालन करना चाहिए।
