
पुणे जिले में सत्ता में साझेदार भाजपा और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के बीच वर्चस्व की खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। भाजपा ने भोर में संग्राम थोपटे और इंदापुर में प्रवीण माने को अपनी पार्टी में शामिल कर पहले ही अजित पवार को झटका दिया है। इसके जवाब में अजित पवार ने दौंड में भाजपा विधायक राहुल कुल को चुनौती देने के लिए पूर्व विधायक रमेश थोरात को अपने खेमे में लाकर राजनीतिक पलटवार किया है।
पुणे जिले में वर्चस्व की जंग
इस समय दोनों दलों की नजरें फिर से इंदापुर विधानसभा सीट पर टिक गई हैं। अजित पवार ने मंत्री पद में फेरबदल करते हुए कृषि मंत्रालय का जिम्मा इंदापुर के विधायक दत्तात्रय भरणे को सौंप दिया है। इसे इंदापुर में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति माना जा रहा है। इसके जवाब में भाजपा ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता हर्षवर्धन पाटील ने भी अपने समर्थकों की बैठकें शुरू कर दी हैं और आगे की राजनीतिक चालें चलने की तैयारी में हैं।
इंदापुर में हुई एक बैठक में हर्षवर्धन पाटील ने संकेत दिए कि आने वाले आठ दिन या महीने भर में अगर उन्हें कोई पद मिलता है, तो तालुका का लगभग 10% खोया हुआ जनाधार वापस आ जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के साथ उनका रिश्ता किसी पद तक सीमित नहीं है, लेकिन राजनीति में परिस्थितियां बदलती रहती हैं और इंतजार करना पड़ता है। उनके इस बयान को भाजपा के साथ उनकी नजदीकियों और संभावित वापसी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक के बाद से यह चर्चा तेज हो गई है कि पाटील जल्द ही भाजपा में वापसी कर सकते हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे के साथ उनकी हालिया मुलाकातों ने इन अटकलों को और हवा दी है। सहकार क्षेत्र में बड़ी पहचान रखने वाले पाटील फरवरी 2024 में भाजपा की सिफारिश पर राष्ट्रीय सहकारी चीनी संघ के अध्यक्ष बने थे। हालांकि, बाद में उन्होंने शरद पवार गुट से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। अब भाजपा द्वारा दिए गए पद से इस्तीफे का दबाव और स्थानीय राजनीति के समीकरण उन्हें फिर से भाजपा खेमे की ओर खींचते दिख रहे हैं।
