
मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने महापालिका चुनाव को देखते हुए अपने पार्टी शाखा अध्यक्षों के साथ अहम बैठक की। इस बैठक में उन्होंने मतदाता सूची में हुई गड़बड़ियों और चुनावी रणनीति पर मार्गदर्शन दिया। हालांकि, बैठक में उन्होंने कौन-से आदेश दिए, इस सवाल पर राज ठाकरे ने साफ कहा, “सांगणार नाही” (नहीं बताऊंगा)। इसी दौरान उन्होंने दादर के कबूतरखाना विवाद पर भी अपनी स्पष्ट राय रखी।
राज ठाकरे का कड़ा रुख
कबूतरखाना मामले पर राज ठाकरे ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले का पालन सभी को करना चाहिए और जैन मुनियों को भी इस पर विचार करना चाहिए। कबूतरों से कई तरह की बीमारियां फैलती हैं, जिसका जिक्र डॉक्टर भी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर हाईकोर्ट ने खाना खिलाने पर रोक लगाई है और फिर भी कोई ऐसा कर रहा है, तो पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए। धर्म के नाम पर आदेश तोड़ना गलत है, क्योंकि ऐसी शुरुआत होने पर बाकी लोग भी वही करने लगेंगे।
राज ठाकरे ने इस दौरान मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोढ़ा महाराष्ट्र के मंत्री हैं, किसी एक समाज के नहीं। उन्हें कोर्ट और महाराष्ट्र का सम्मान बनाए रखना चाहिए। आंदोलन में अगर मराठी लोगों पर कार्रवाई होती है तो दूसरे लोगों पर भी होनी चाहिए। जो लोग आंदोलन में चाकू-छुरी लेकर आए, उन पर पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ऐसा उन्होंने कहा।
कल्याण-डोंबिवली महापालिका में स्वतंत्रता दिवस पर मांसबंदी और कत्लखाना बंदी के फैसले पर पूछे गए सवाल पर राज ठाकरे बोले कि मैंने हमारे कार्यकर्ताओं से कहा है कि इसे जारी रखें। महानगरपालिका को इस तरह के फैसले लेने का अधिकार नहीं है। कोई क्या खाए या न खाए, यह तय करने का अधिकार सरकार या महापालिका के पास नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर इस तरह की पाबंदी विरोधाभासी है। सरकार को लोगों की धार्मिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
