
महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय और प्रभावशाली नेता शरद पवार ने शनिवार को एक कार्यक्रम में अपने राजनीतिक सफर से जुड़ा बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वसंतदादा पाटिल की सरकार गिराने में उनकी सीधी भूमिका रही थी। पवार ने कहा कि उस समय कांग्रेस पार्टी दो हिस्सों में बंट चुकी थी और चुनाव में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। कांग्रेस के प्रति नाराजगी को देखते हुए उन्होंने और उनके साथियों ने तय किया कि वसंतदादा की सरकार गिराई जाए और इसके बाद वे खुद मुख्यमंत्री बने।
शरद पवार का बड़ा खुलासा
शरद पवार ने उस दौर की राजनीति का किस्सा सुनाते हुए कहा कि यशवंतराव चव्हाण, विनायकराव पाटिल और वसंतदादा जैसे नेताओं का मार्गदर्शन उन्हें हमेशा मिलता रहा। उन्होंने बताया कि इन वरिष्ठ नेताओं ने ही महाराष्ट्र के नेतृत्व की मजबूत फौज खड़ी की, जिससे राज्य का चेहरा बदला और वह देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ। पवार ने कहा कि इन नेताओं का दिल बहुत बड़ा था और उनकी सोच दूरदर्शी रही, जिसने महाराष्ट्र को मजबूती दी।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए पवार ने कहा कि कांग्रेस के विभाजन के बाद वे एस. कांग्रेस में थे और चुनाव में नतीजे स्पष्ट नहीं थे। ऐसे में कुछ सीटें कांग्रेस को और कुछ उनकी पार्टी को मिलीं। अंततः समझौता कर वसंतदादा पाटिल को मुख्यमंत्री बनाया गया। हालांकि, युवा नेताओं में कांग्रेस के प्रति गुस्सा था और उसी गुस्से में उन्होंने पाटिल सरकार को गिराने का फैसला लिया। पवार ने कहा, “हमने तय किया कि दादाजी की सरकार गिरानी है और हमने ऐसा किया। इसके बाद मेरे हाथ में सत्ता आई।”
पवार ने आगे बताया कि दस साल बाद जब फिर से सब साथ आए, तो मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा हुई। उस बैठक में वसंतदादा ने साफ कहा कि अब कोई चर्चा नहीं होगी और पार्टी का नेतृत्व शरद पवार को दिया जाएगा। पवार ने भावुक होते हुए कहा कि यह वही व्यक्ति थे जिनकी सरकार उन्होंने कभी गिराई थी, लेकिन वसंतदादा ने बड़े दिल का परिचय देते हुए उन्हें दोबारा नेतृत्व सौंपा। उन्होंने कहा कि यह उस दौर की राजनीति की परिपक्वता और बड़े दिल वाले नेतृत्व का उदाहरण है।
