महाराष्ट्र: शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे का एकनाथ शिंदे को बताया “फेकनाथ”, बोले- अगर जवाब नहीं देना आता तो मंत्री क्यों बने

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के नेता आदित्य ठाकरे ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को 'फेकनाथ' बताया है। इसके अलावा उन्होंने बागी सांसदों को लेकर कहा, उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर जनता के बीच दोबारा जाना चाहिए।
Aaditya Thackeray

एक तरफ जहां पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस पार्टी में टूट हुई तो वही महाराष्ट्र में अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट को बड़ा झटका लगा है। सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शिवसेना का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दो धड़ों के बीच संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) ने मंगलवार को डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने एकनाथ शिंदे को ‘फेकनाथ’ करार दिया है।

भाजपा के समर्थन में चुनाव लड़कर दिखाएं बागी सांसद: आदित्य ठाकरे

आदित्य ठाकरे ने बागी सांसदों पर हमला बोलते हुए कहा कि जिन सांसदों ने पाला बदला है, उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर जनता के बीच दोबारा जाना चाहिए। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थन और नेतृत्व में चुनाव लड़ना चाहते हैं, तो जनता का सामना करें। उनका दावा था कि उनकी पार्टी ने लोगों का विश्वास और दिल जीता है। वहीं अगर चुनाव लड़े तो जनता उसके जरिए अपनी राय स्पष्ट कर देगी।

आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों में विपक्ष के बढ़ते प्रभाव को लेकर डर का माहौल है। उन्होंने कहा कि पहले सांसदों को अपने पाले में लाने की कोशिश की जा रही है और आगे चलकर विधायकों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों को भी निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी हर परिस्थिति में संघर्ष जारी रखेगी और जरूरत पड़ने पर अकेले दम पर भी लड़ाई लड़ने से पीछे नहीं हटेगी।

जिम्मेदारियों से बचते रहे एकनाथ शिंदे: आदित्य ठाकरे

महाराष्ट्र में 22 जून से मानसून अधिवेशन सत्र की शुरुआत हो चुकी है। मंगलवार को कार्यवाही के दौरान गरमा गर्मी का माहौल रहा। इस बीच, आदित्य ठाकरे ने कहा कि 2022 में सरकार गिरने के बाद से एकनाथ शिंदे हर विधानसभा सत्र में अपनी जिम्मेदारियों से बचते रहे हैं। प्रश्नकाल में विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवाल जनता और महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों से संबंधित होते हैं, जिनका जवाब अपेक्षित होता है। लेकिन हर सत्र में देखा जाता है कि वह अपने विभागों से जुड़े सवालों का जवाब देने की जिम्मेदारी किसी अन्य मंत्री को सौंप देते हैं।

उन्होंने कहा, यदि आप अपने विभागों के सवालों का जवाब नहीं देना चाहते तो फिर उन विभागों को अपने पास रखने का क्या औचित्य है? उन्हें स्थायी रूप से संबंधित मंत्रियों को सौंप देना चाहिए। अगर मुख्यमंत्री अपने विभागों से जुड़े सवालों का जवाब दे सकते हैं, तो आप ऐसा क्यों नहीं कर सकते? यदि जवाब देने का आत्मविश्वास नहीं है, तो फिर मंत्री पद पर बने रहने का क्या मतलब है?

Shyam Dwivedi
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7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi →
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