भारतीय सेना ने कर्नल श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर के पद पर पदोन्नत किया है। दरअसल वर्ष 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में बरी होने के बाद इसे उनके सैन्य करियर की अहम उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि इस फैसले के बाद राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। अबू आसिम आजमी ने इस पदोन्नति पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार पर न्याय प्रणाली में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भले ही सरकार के पास संसद में बहुमत हो, लेकिन देश को संविधान और कानून के अनुसार ही चलना चाहिए।
दरअसल आजमी ने मालेगांव विस्फोट मामले की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इस मामले में सरकारी वकील पर दबाव होने की बात सामने आई थी। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी वकील ही आरोपी के प्रति सहानुभूति दिखाए तो न्याय की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
कई गवाहों को अदालत में पेश नहीं किया गया: अबू आसिम आजमी
दरअसल सपा नेता ने यह भी कहा कि इस मामले में कई महत्वपूर्ण गवाह विरोधी हो गए थे और कई गवाहों को अदालत में पेश नहीं किया गया। उनके अनुसार इससे न्याय प्रक्रिया पर संदेह पैदा होता है और पीड़ितों को न्याय मिलने पर सवाल उठते हैं। अबू आजमी ने 2006 के मुंबई ट्रेन विस्फोट मामले का उदाहरण देते हुए सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उस मामले में जब कुछ आरोपी बरी हुए थे तो सरकार ने तुरंत उच्च अदालत में अपील की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपियों के बरी होने के बाद ऐसी अपील क्यों नहीं की गई।
मुख्यमंत्री और गृहमंत्री इस पूरे मामले पर स्पष्ट बयान दें: अबू आसिम आजमी
इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री इस पूरे मामले पर स्पष्ट बयान दें और बताएं कि इस मामले में अपील क्यों नहीं की गई। आजमी ने यह भी आरोप लगाया कि देश में अलग-अलग मामलों में अलग तरह का रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक सैन्यकर्मी अनवर अली का मामला भी सामने आया था, जो कई साल तक जेल में रहे, लेकिन रिहाई के बाद उन्हें नौकरी और बकाया वेतन नहीं मिला। दरअसल उन्होंने कहा कि देश में सभी के लिए कानून समान होना चाहिए। आखिर में उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या देश संविधान के सिद्धांतों के अनुसार चलेगा या फिर मनमाने फैसलों के आधार पर।






