मुंबई में आयोजित एक कबड्डी कार्यक्रम के दौरान शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक महत्वपूर्ण दावा किया है। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज की जन्मभूमि से लाई गई मिट्टी राम जन्मभूमि को सौंपने के ठीक एक साल के भीतर ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण पूरा हो गया। उद्धव ठाकरे ने इस बात पर जोर दिया कि यह मिट्टी का असीम महत्व है जिसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। उद्धव ठाकरे अपने बेटे और युवा सेना प्रमुख आदित्य ठाकरे के साथ मुंबई के तबेला मैदान-श्रमिक जिमखाना मैदान में आयोजित हीरक जयंती समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे, जिसे महाराष्ट्र में कबड्डी का ‘पंढरी’ भी कहा जाता है, जो इस खेल के लिए एक ऐतिहासिक और पवित्र स्थान माना जाता है।
अपने संबोधन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उस समय को याद किया जब वह मुख्यमंत्री पद संभालने से पहले शिवाजी महाराज की जन्मभूमि से मिट्टी लेकर राम जन्मभूमि का दौरा करने गए थे। उन्होंने सभा को बताया, “मैंने वह पवित्र मिट्टी अयोध्या में पुजारियों को सौंपी थी और आप विश्वास नहीं करेंगे, उसके ठीक एक साल के अंदर राम मंदिर बनकर तैयार हो गया।” उद्धव ने इस घटना को एक उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए मिट्टी के गहरे महत्व, मातृभूमि के प्रति कर्ज और उसे कभी न भूलने की सीख से जोड़ा। उन्होंने भावुक होकर कहा कि मिट्टी का सम्मान और उसकी पहचान को बनाए रखना हर व्यक्ति का सर्वोपरि कर्तव्य है।
अपने भाषण में उद्धव ठाकरे ने सत्ताधारी पार्टी पर अप्रत्यक्ष रूप से तंज कसते हुए राजनीति के मौजूदा स्वरूप की तुलना कबड्डी के खेल से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह कबड्डी में फुर्ती, मजबूत पकड़, सही समय पर दांव लगाना और उसे पलट देना जैसे गुण जरूरी होते हैं, ठीक वैसे ही आज की राजनीति में भी इन गुणों की आवश्यकता है। उन्होंने अपनी पार्टी के मौजूदा राजनीतिक संघर्ष और चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा, “इसलिए हम राजनीति में भी एक अलग तरह की कबड्डी खेलते हैं।” उनका यह बयान महाराष्ट्र की सत्ता में हुए बदलाव और शिवसेना में विभाजन के बाद शिवसेना (यूबीटी) के राजनीतिक दांव-पेंच को सीधे तौर पर दर्शाता है।
कबड्डी के बदलते स्वरूप पर उद्धव ठाकरे का विचार
कबड्डी के बदलते स्वरूप पर भी उद्धव ठाकरे ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि एक समय था जब महाराष्ट्र के दिग्गज कबड्डी खिलाड़ी मिट्टी के मैदान में अपना दमखम दिखाते थे, लेकिन अब आधुनिकता के चलते मैट पर कबड्डी खेलने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मैट पर खेलना गलत नहीं है और यह समय की मांग है, लेकिन खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को अपनी जड़ों यानी मिट्टी और मातृभूमि को कभी नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कबड्डी खिलाड़ियों की तुलना धरती से उगने वाले सितारों से की, जो अपनी मेहनत और लगन से ऊंचाइयों को छूते हैं। उद्धव ने कहा कि उन सितारों के साथ वह और आदित्य हमेशा खड़े हैं, और यह उनके लिए एक खुशी का पल है।
यह हीरक जयंती समारोह शिवसेना (यूबीटी) विधायक सुनील शिंदे की पहल पर आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य कबड्डी के खेल और उससे जुड़ी हस्तियों का सम्मान करना था। इस अवसर पर उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र की धरती से जुड़े कबड्डी के खेल में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली कई प्रतिष्ठित हस्तियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। उन्होंने मैदान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की जमकर सराहना की और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस कार्यक्रम में युवा सेना प्रमुख और विधायक आदित्य ठाकरे, सांसद अरविंद सावंत, विधायक भास्कर जाधव, विधायक अजय चौधरी, शिवसेना उपनेता और मुंबई नगर निगम में विपक्ष की नेता किशोरी पेडनेकर, संभागीय प्रमुख विधायक महेश सावंत, मुंबई के पूर्व महापौर महादेव देवले, पूर्व हॉकी खिलाड़ी धनराज पिल्ले सहित कई दिग्गज कबड्डी खिलाड़ी, शिवसेना पदाधिकारी और बड़ी संख्या में शिवसैनिक उपस्थित थे। यह उपस्थिति शिवसेना (यूबीटी) के जमीनी स्तर पर पकड़ और खेल के प्रति उनके लगाव को प्रदर्शित करती है।
2018 में शिवाजी जन्मभूमि की मिट्टी लेकर अयोध्या गए थे उद्धव
दरअसल, उद्धव ठाकरे नवंबर 2018 में पुणे जिले के ऐतिहासिक शिवनेरी किले की मिट्टी लेकर दो दिवसीय दौरे पर अयोध्या गए थे। शिवनेरी किला छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्मस्थान है, और वहां की मिट्टी को हिंदुत्ववादी भावनाओं से जोड़ा जाता है। उद्धव ने उस समय बताया था कि वह इस पवित्र मिट्टी को राम जन्मभूमि स्थल पर स्थित राम लल्ला के अस्थायी मंदिर के महंत या मुख्य पुजारी को सौंपेंगे। उन्होंने तब कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज समस्त हिंदुओं द्वारा आदरणीय हैं और ऐसे शक्तिशाली हिंदू राजा की जन्मभूमि से मुट्ठी भर मिट्टी लेकर वह समस्त हिंदू समुदाय की इच्छा और कामना को अपने साथ ले जा रहे हैं। अयोध्या प्राचीन कौशल राज्य की राजधानी थी, जिस पर भगवान राम के पिता राजा दशरथ का शासन था। उद्धव की यह यात्रा उस समय उनकी हिंदुत्ववादी पहचान को मजबूत करने और राम मंदिर आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाने के रूप में देखी गई थी, जब राम मंदिर निर्माण का मुद्दा जोर-शोर से उठाया जा रहा था। उनका ताजा बयान उसी ऐतिहासिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।






