सुप्रीम कोर्ट द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए निर्वाचन आयोग की दस्तावेजीकरण व्यवस्था को बरकरार रखने के बाद, शिवसेना (UBT) गुट ने अपने रुख को स्पष्ट किया है। दरअसल उद्धव ठाकरे गुट के नेता आनंद दुबे ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि वे SIR के विरोधी नहीं हैं, बल्कि इसके नाम पर चल रही साजिशों के खिलाफ हैं। उनकी मांग है कि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी हो और हर मतदाता को न्याय मिले।
दरअसल आनंद दुबे ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यह सुनिश्चित होना चाहिए कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज है और वह भारतीय नागरिक है, तो उसे वोट देने के अधिकार से किसी भी कीमत पर वंचित न किया जाए। वहीं उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमारे देश में हर पांच साल में चुनाव होते हैं और इस दौरान लाखों नए मतदाता जुड़ते हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि मतदाताओं को उनका हक मिले और पूरी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
सरकार और चुनाव आयोग दोनों पर निशाना साधा
दरअसल आनंद दुबे ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि कोई ऐसा व्यक्ति जो भारत का मतदाता नहीं है और चोरी-छिपे घुसपैठिए के तौर पर आकर वोट देकर चला जाता है, ऐसा भी नहीं होना चाहिए। उन्होंने सरकार और चुनाव आयोग दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि इतनी सीधी-सादी बात उन्हें समझ नहीं आ रही है। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि शिवसेना (यूबीटी) SIR के खिलाफ नहीं है, बल्कि SIR के नाम पर रचे जा रहे षड्यंत्रों के विरुद्ध है।
यह प्रतिक्रिया सुप्रीम कोर्ट के उस महत्वपूर्ण फैसले के बाद आई है, जिसमें अदालत ने 27 मई बुधवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा अपनाई गई दस्तावेजीकरण की व्यवस्था को सही ठहराया था। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था न तो मनमानी थी और न ही वैधानिक योजना से बाहर थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने SIR की कवायद से संबंधित निर्वाचन आयोग के अधिकार को पूरी तरह से बरकरार रखा। खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘आधार’ कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
फैसले में क्या था?
चीफ जस्टिस ने अपने 124 पृष्ठों के विस्तृत फैसले में, जनगणना प्रक्रिया के हिस्से के रूप में निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित दस्तावेजीकरण प्रक्रिया की वैधता पर अलग से विचार किया। फैसले में कहा गया है कि चुनाव आयोग को निवास और पात्रता जैसी वैधानिक शर्तों को स्थापित करने में दस्तावेजों के महत्व के आधार पर उन्हें वर्गीकृत करने का पूरा अधिकार है। यह निर्णय चुनावी प्रक्रियाओं में आयोग की स्वायत्तता और उसके द्वारा अपनाई गई पद्धतियों की वैधानिकता को पुष्ट करता है।
वहीं, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ चल रहे एक मामले पर भी शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में अब भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार आ चुकी है। ऐसे में यदि वे ममता बनर्जी या अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मामले दर्ज करते हैं और उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश करते हैं, तो यह सब स्वाभाविक रूप से होगा। दुबे ने कहा कि इसके जवाब में विपक्ष कानूनी लड़ाई लड़ेगा और भाजपा अपनी लड़ाई लड़ेगी।






