महाराष्ट्र में जहरीली शराब का तांडव जारी है। पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में अवैध और जानलेवा शराब पीने से एक-दो नहीं, बल्कि 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। इस घटना ने एक बार फिर अवैध शराब के कारोबार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और प्रशासन की नींद इस त्रासदी के बाद खुली है। त्वरित कार्रवाई करते हुए एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है। यह घटनाक्रम पिछले दो दिनों का है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिंपरी-चिंचवाड़ में जहरीली शराब ने सात जिंदगियां लील लीं, वहीं पुणे में पांच लोगों के लिए यह जानलेवा साबित हुई। मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे स्थिति की गंभीरता स्पष्ट होती है। सबसे हृदय विदारक घटना पुणे के फुगेवाड़ी में सामने आई, जहां एक ही परिवार के दो सगे भाइयों की जहरीली शराब पीने से मौत हो गई। इस त्रासदी ने पूरे परिवार को तबाह कर दिया है, और इलाके में शोक का माहौल है।
फुगेवाड़ी में जहरीली शराब से 6 मौतें
पुलिस अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पिंपरी-चिंचवाड़ के फुगेवाड़ी इलाके में अकेले छह लोगों की मौत दर्ज की गई है। इसमें वे दो सगे भाई भी शामिल हैं, जिनकी मौत की खबर ने सभी को झकझोर कर रख दिया। पुणे के हड़पसर इलाके में भी जहरीली शराब के सेवन से छह लोगों की जान चली गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अवैध शराब का जाल कितना गहरा है और कैसे यह लोगों की जान ले रहा है।
हड़पसर इलाके में मौत के ये मामले सासाने नगर और कालेपदल से सामने आए हैं। मृतकों में 45 वर्षीय राहुल शरद क्षीरसागर, 45 वर्षीय विजय भुखुरलाल शर्मा, अरुण दादर और अशोक रमेश चव्हाण जैसे नाम शामिल हैं। इन सभी की मौत ने उनके परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। वहीं, फुगेवाड़ी में जिन लोगों की जान गई है, उनमें राजेश राजपूत, पांडुरंग फुगे, आनंद देसाई, अकबर पठान और आनंद निकालजे के नाम सामने आए हैं। इन सभी की असामयिक मौत ने अवैध शराब के कारोबार के भयावह परिणामों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने दिए जांच के निर्देश
घटना की गंभीरता को देखते हुए, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ के पुलिस अधिकारियों को इस पूरे मामले की गहन जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और इस मामले की तह तक जाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह निर्देश दर्शाता है कि सरकार इस त्रासदी को कितनी गंभीरता से ले रही है। उच्च स्तरीय जांच के आदेश के बाद अब पुलिस और आबकारी विभाग पर दबाव बढ़ गया है कि वे अवैध शराब के इस कारोबार की जड़ें खोदकर निकालें और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं। इस घटना ने एक बार फिर अवैध शराब के उत्पादन और बिक्री में मिलीभगत के आरोपों को बल दिया है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है।






